महर्षि दयानन्द का प्रेरणादायक जीवन चरित्र पढ़िए।

 महर्षि दयानन्द का प्रेरणादायक जीवन चरित्र पढ़िए।

 8"×10"  सजिल्द 980पृष्ठ

₹390 (डाक खर्च सहित)।

मंगवाने के लिए 7015591564 पर व्हाट्सएप से सम्पर्क करें।


महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती जीवनियों में अमर हुतात्मा पंडित लेखराम जी द्वारा लिखित जीवन चरित्र ही मूल ग्रंथ , सर्वाधिक प्रामाणिक तथा मान्य है। महर्षि के सभी जीवन चरित्र प्राय: इसकी सहायता से लिखे गये है यद्यपि महर्षि की जीवन सम्बन्धी घटनाओं के संग्रह में अन्य भी अनेक व्यक्तियों ने प्रशंसनीय परिश्रम किया है किन्तु सबसे अधिक घटनाएँ पंडीत लेखराम जी ने एकत्र की जो कि इसमें विद्यमान है इस जीवन चरित्र की परम विशेषता यह है की इसमें पंडित जी ने भारत में स्वयं घूम  घूम  कर महर्षि के प्रत्यक्ष द्रष्टाओ एवं श्रोताओ की खोज की और उन प्रत्यक्ष दर्शियों द्वारा सुनाई गई घटनाओं का वर्णन किया है।


प्रस्तुत है इस पुस्तक का एक अंश-

महर्षि दयानन्द के समय सन्यासियों की दशा-


साधारणतया मेले में साधुओं की अत्यन्त बुरी अवस्था थी। संन्यासी जिनका काम जगत् का सुधार करना था वह गिरि, पुरी, भारती, आरण्य, पर्वत, आश्रम, सरस्वती, सागर, तीर्थ, गुसाईं - - इन दस भागों में विभक्त होकर परस्पर गृहयुद्ध में फँसे हुए थे। गुसाई विवाह करके भगवे बाने को लाज लगा रहे थे क्योंकि कलियुगी लोकोक्ति के अनुसार भोग और योग को मिला रहे थे । वे नाम के त्यागी थे परन्तु वास्तव में गृहस्थियों के बाबा बन रहे थे। मद्यपान, मासभक्षण, व्यभिचार जो वाममार्ग, चोलीमार्ग और बीजमार्ग के साधन हैं, उन्हें वे 'अहं ब्रह्मास्मि' की तरंग में माता का दुग्ध समझ रहे थे। सत्य का मार्ग भुलाकर स्वयं ब्रह्म बने हुए थे। 

निर्मले नाम ही के निर्मले थे अन्यथा सत्यधर्म की निर्मलता और उज्ज्वलता से कोसों दूर थे और दूर क्यों न होते, क्या कहीं स्वार्थ में भी पवित्रता हो सकती है।

उदासी - उदास तो नही प्रत्युत साक्षात् आशा की मूर्ति थे । हाथी, घोडे, रुपहली और स्वर्णमयी भूलें, मखमली तकिये और जरबफ्त ( एक प्रकार का बहुमूल्य कपड़ा) के गदेले, सोने के कंगन और चांदी के उगालदान - साराश यह कि सब कुछ पास था। उन्हें देख कर कौन है जो उन्हें उदासी कहे और अपनी मूढ़ता को स्वीकार न करे?


वैरागी - यूँ मुंह से कहने को सब वैराग्य विद्यमान, त्याग विद्यमान, लोगों का धन फूंकने को आग की अंगीठी भी पास में, परन्तु काला अक्षर भैस बराबर | खाने और पड़े रहने या वैरागिनों में जीवन व्यतीत करने के अतिरिक्त सार्थक वैराग्य का वहां पता नहीं था । गीता का ( मूल ) पाठमात्र भी हजारों में से एक को ही याद होगा और अर्थ लाखों में से दस बारह जानते होंगे और इस पर भी यह दशा कि ऐसा व्यक्ति ढूंढे से भी अप्राप्य जो तम्बाकू, चरस, भंग अथवा गांजे का सेवन न करता हो । योगी गोरखनाथ के नाम को दूषित करने वाले, कानों में सुनहरी कुंडल डाले कोई किसी गद्दी का महत्त और कोई किसी का | धर्म-कर्म से अपरिचित, योग के पूरे शत्रु, मद्यमॉस के सेवन में चतुर, लोगों के सरल प्रकृति बच्चों के कान फाड़ने में सजग । राजा महाराजा आँख के अन्धे, गाँठ के पूरे।

 इसी प्रकार के मुस्टंडों के चेले और अनुयायी, तन, मन, धन, गुसाईं और गुरु जी के  अर्पण करने वाले, चाटुकार और भीरु दरबारों के संसर्ग में दिन रात रहकर धर्म और संसार से बेसुध अफीम के गोले चढ़ाने में निपुण साधुओं का अविद्यान्धकार में फसना और गृहस्थियों का विनाश, राजाओं की मूर्खों से संगति और विद्वानों के प्रति उपेक्षा; विद्वानों का मौनधारण और सत्य का प्रकाश न करना और इस पर एक सत्यप्रिय तथा सत्यवादी की निन्दा, यह सब देखकर स्वामी जी का चित्त अत्यन्त उत्तेजित हुआ, हृदय भर आया । समस्त भारत निवासियों के प्रतिनिधियों के रूप में जो प्रत्येक प्रकार के मनुष्य वहां उपस्थित थे उनको और समस्त मेले को उनके मर्मज्ञ स्वभाव और मनुष्य को पहचानने वाली आँखों ने दिव्य और सूक्ष्म दृष्टि से देखा।

Popular posts from this blog

वैदिक धर्म की विशेषताएं 

ब्रह्मचर्य और दिनचर्या

अंधविश्वास : किसी भी जीव की हत्या करना पाप है, किन्तु मक्खी, मच्छर, कीड़े मकोड़े को मारने में कोई पाप नही होता ।