आज का वेद मंत्र

 🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️

🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷


दिनांक  - -    १६ सितम्बर २०२२ ईस्वी 

 

दिन  - -   शुक्रवार 


  🌓 तिथि - - -  षष्ठी ( १२:२२तक तत्पश्चात सप्तमी )



🪐 नक्षत्र -  -  कृत्तिका ( २१:३९ तक तत्पश्चात रोहिणी )


पक्ष  - -  कृष्ण 


 मास  - -   आश्विन 


ऋतु  - -  शरद 

,  

सूर्य  - -  दक्षिणायन


🌞 सूर्योदय  - - दिल्ली में प्रातः  ६:१० पर


🌞 सूर्यास्त  - -  १८:२१ पर 


🌓 चन्द्रोदय  - -  २२:२३  पर 


🌓चन्द्रास्त  - -  ११:४२ पर 


सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२३


कलयुगाब्द  - - ५१२३


विक्रम संवत्  - - २०७९


शक संवत्  - - १९४४


दयानंदाब्द  - - १९८


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🚩‼️ओ३म्‼️🚩


 🔥यज्ञों वै श्रेष्ठतमं कर्म:

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   यज्ञ करने वालों को देवी और देवता कहा जाता है और इसे देवयज्ञ कहते हैं। यह आकाश में बोया जाता है और अन्न भूमि में। अन्न को मनुष्य बोते हैं और यज्ञ देवता बोते हैं। अन्न - फल आदि जो पदार्थ हम भूमि में बोते है, उसे हजार गुणा करके भूमि हमको देती है, वैसे ही जो हम आकाश में बोयेगे, आकाश भी हमें हजार गुणा करके देगा, प्रन्तु यह ध्यान रखे कि आकाश भूमि से करोड़ों गुणा बड़ा है अत: देवताओं के सभी कार्य महान् होते है। 


     यज्ञ सृष्टि रचना का आधार

 है। 


      यज्ञ आत्मा - उन्नति का अमर संगीत है।


     यज्ञ आत्मबल , संकल्प बल, और मनोबल का अनुपम आधार है।


    यज्ञ मनोवाञिछत फलों का दाता है।


    यज्ञ से धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 


   यज्ञ भव-सिन्धु का पतवार है।


     यज्ञ से दैविक,दैहिक और भौतिक तापों का उन्मूलन होता है। 


     यज्ञमय जीवन बनाकर अक्षय सुखों को प्राप्त करों, यह वेद का उपदेश है।


     यज्ञ करने वाला महापुरुष, विश्ववन्दनीय, अभिनन्दनीय और पूजनीय बनता है। 


     यज्ञ करने से मनुष्य शतायु होकर दरिद्रता, और बिमारियों का नाश करता है। 


    यज्ञ की महिमा चारों वेद, छ: शास्त्र, उपनिषद आदि सभी में वर्णित है। 


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🕉️🚩आज का वेद मंत्र 🕉️🚩


🌷ओ३म् आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उदभिद: । देवा नो यथा सदमिदवृधेऽअसन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे। ( यजुर्वेद २५|१४)


💐अर्थ:- हे ईश्वर! हमारे शुद्ध विचार तथा उत्तम श्रेष्ठ कर्म निर्विध्न सम्पन्न होते रहे।  सर्वोत्तम विद्वद् जन हमारी सभा में सर्वदा हमारी वृद्धि और रक्षा के लिए प्रतिदिन बनी रहें ।


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 🔥विश्व के एकमात्र वैदिक  पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

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 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ🕉🚩🙏


(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त)       🔮🚨💧🚨 🔮


ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये परार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- त्रिविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२३ ) सृष्ट्यब्दे】【 नवसप्तत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०७९ ) वैक्रमाब्दे 】 【 अष्टनवत्यधिकशततमे ( १९८ ) दयानन्दाब्दे, नल-संवत्सरे,  रवि- दक्षिणयाने शरद -ऋतौ, आश्विन -मासे ,कृष्ण  - पक्षे, - षष्ठयां  तिथौ,  - कृत्तिका नक्षत्रे, शुक्रवासरे  , तदनुसार  १६ सितम्बर , २०२२ ईस्वी , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे 

आर्यावर्तान्तर्गते.....प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ,  आत्मकल्याणार्थ,  रोग, शोक, निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे


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