आज का वेद मंत्र

 🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️

🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷


दिनांक  - -    १४ सितम्बर २०२२ ईस्वी 

 

दिन  - -   बुधवार 


  🌔 तिथि - - -  चतुर्थी ( २०:२८ तक तत्पश्चात पंचमी  )



🪐 नक्षत्र -  -  अश्विनी ( २७:४१+ तक तत्पश्चात भरणी 


पक्ष  - -  कृष्ण 


 मास  - -   आश्विन 


ऋतु  - -  शरद 

,  

सूर्य  - -  दक्षिणायन


🌞 सूर्योदय  - - दिल्ली में प्रातः  ६:०९ पर


🌞 सूर्यास्त  - -  १८:२४ पर 


🌔 चन्द्रोदय  - -  २१:००  पर 


🌔चन्द्रास्त  - -  ०९:४८ पर 


सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२३


कलयुगाब्द  - - ५१२३


विक्रम संवत्  - - २०७९


शक संवत्  - - १९४४


दयानंदाब्द  - - १९८


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🔥 यज्ञ 🔥

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 प्रश्न  :- यज्ञ क्या है? यज्ञ के क्या अर्थ है?


 उत्तर  :- संसार में जितने उपकार के कार्य है ये सब यज्ञ कहलाते हैं। 


       यज्ञ के तीन अर्थ है  - १ -  देव पूजा -   २  -  संगतिकरण  - ३  - दान ।


 देव पूजा किसे कहते हैं? 


 उत्तर  :- अग्नि  - आदि पदार्थों का समुचित उपयोग तथा वृद्धों, देवों अर्थात विद्वानों, संन्यासियो का पारमार्थिक सुख सम्पादन के लिए आदर- सत्कार करना। 


 संगतिकरण किसे कहते हैं? 


 उत्तर  :-  १ - अग्नि आदि पदार्थों के साथ यथा योग्य संगति, जिससे अनेक विधि शिल्प कार्यों की सिद्धि होती है। 


           २ - विद्वान महात्मा पुरूषों का संग, परमात्मा से आत्मा का संयोग या प्राप्ति करना, संगतिकरण कहलाता है। 


  दान किसे कहते हैं? 


 उत्तर  :- अपने सामर्थ्य के अनुसार निष्काम भाव से सुपात्र को उसकी आवश्यकतानुसार धन, वस्त्र या अन्य पदार्थ अथवा विद्या आदि प्रदान करना दान कहलाता है। संसार में जितने भी दान है उनमें वेद- विद्या का दान सबसे उत्तम है। 


प्रश्न  :- पंच महायज्ञ कौन- कौन से हैं?


 उत्तर  :- ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ , अथितियज्ञ तथा बलिवैश्वदेवयज्ञ ये ये पांचों यज्ञ पंच महायज्ञ कहलाते है। 


प्रश्न  :- ब्रह्मयज्ञ किसे कहते हैं? 


 उत्तर  :- वेदादि शास्त्रों का पठन-पाठन प्राणायाम और वैदिक सन्ध्या अर्थात् परमेश्वर की स्तुति उपासना आदि को ब्रह्मयज्ञ कहते है। 


 प्रश्न  :- देवयज्ञ किसे कहते हैं? 


 उत्तर :- अग्नि होत्र से लेकर अश्वमेध पर्यन्त सब यज्ञों को देव यज्ञ कहते हैं। 


प्रश्न  :- पितृयज्ञ किसे कहते हैं? 


उत्तर  :-  जीवित- माता- पिता, दादा- दादी, नाना-नानी, आचार्य तथा अन्य सब वृद्धों के सत्कार और सेवा को पितृयज्ञ कहते है। 


 प्रश्न  :-  अतिथि यज्ञ किसे कहते हैं? 


उत्तर  :- पूर्व सूचना के बिना कोई विद्वान, धार्मिक पुरुष, सन्यासी आदि अपने स्थान पर आवे तो उनकी सेवा सत्कार आदि करना तथा उनसे ज्ञान प्राप्त करने को अतिथि यज्ञ कहते हैं। 


 प्रश्न  :- बलिवैश्वदेवयज्ञ किसे कहते हैं? 


 उत्तर  :- पशु-पक्षियों, जानवरों, कौवे ,कबूतर ,कुत्ते ,कृमि आदि को जो भोजन कराया जाता है उसे बलिवैश्वदेवयज्ञ कहते है। 


 प्रश्न  :- इन यज्ञों के करने के क्या लाभ है?


 उत्तर  :- इनके करने से मनुष्य धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष ( जीवन के अन्तिम लक्ष्य  ) तक पहुंचने के योग्य हो जाता है। 


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🚩📚आज का वेद मंत्र 📚🚩


🌷ओ३म् अभयं मित्रादभयममित्रादभयमं ज्ञातादभयं परोक्षात्।  अभयं नक्त्तमभयं दिवा न: सर्वा आशा मम मित्रं भवन्तु। ( अथर्ववेद १९|१५|६ )


💐 अर्थ  :- हे अभय प्रभु! हमें मित्र से भय न हो और अमित्र से भय न हो, जाने हुए व न जाने हुए  लोगों से भय न हो, दिन और  रात्रि सभी कालों में हम निर्भीक हो।सब आशायें व दिशायें मेरे लिए हितकारी हो। 


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🔥विश्व के एकमात्र वैदिक  पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

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 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ🕉🚩🙏


(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त)       🔮🚨💧🚨 🔮


ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये परार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- त्रिविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२३ ) सृष्ट्यब्दे】【 नवसप्तत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०७९ ) वैक्रमाब्दे 】 【 अष्टनवत्यधिकशततमे ( १९८ ) दयानन्दाब्दे, नल-संवत्सरे,  रवि- दक्षिणयाने शरद -ऋतौ, आश्विन -मासे ,कृष्ण  - पक्षे, - चतुर्थ्यां  तिथौ,  - अश्विनी नक्षत्रे, बुधवासरे , तदनुसार  १४ सितम्बर , २०२२ ईस्वी , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे 

आर्यावर्तान्तर्गते.....प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ,  आत्मकल्याणार्थ,  रोग, शोक, निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे


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