🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ🕉🚩🙏

 🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️

🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷


दिनांक  - -    २४  सितम्बर २०२२ ईस्वी 

 

दिन  - -  शनिवार 



  🌘 तिथि - - -  चतुर्दशी ( २७:१५+ तक तत्पश्चात  अमावस्या )



🪐 नक्षत्र -  -  मघा ( ११:४५ तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुन )


पक्ष  - -  कृष्ण 


 मास  - -   आश्विन 


ऋतु  - -  शरद 

,  

सूर्य  - -  दक्षिणायन


🌞 सूर्योदय  - - दिल्ली में प्रातः  ६:१४ पर


🌞 सूर्यास्त  - -  १८:१२ पर 


🌘 चन्द्रोदय  - -  २९:२५ +  पर 


🌘चन्द्रास्त  - -  १७:२५  पर 


सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२३


कलयुगाब्द  - - ५१२३


विक्रम संवत्  - - २०७९


शक संवत्  - - १९४४


दयानंदाब्द  - - १९८


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🚩‼️ओ३म् ‼️🚩


 🔥वेद ही ईश्वर कृत क्यों ? 

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  १.वेद हर सृष्टि के आदि में चार ऋषियों के मन में स्वयं ईश्वर द्वारा प्रगट किये जाते हैं !


   २.वेद सब मनुष्यों के लिए हैं, सब वर्गों के लिये है !


  ३.वेद संस्कृत भाषा में हैं जिसे सिखने के लिए सबको एक जैसा परिश्रम करना पड़ता है !

 

   ४.वेद में सब प्रकार का ज्ञान विज्ञान सूत्र रुप में है !


  ५.वेदों में सब बातें ईश्वर के गुण कर्म स्वभाव अनुसार हैं !


  ६.वेद में सब बातें सृष्टि नियमों के अनुसार हैं ।


  ७.वेद में राजा महाराजाओं वा काल्पनिक देवी देवता का इतिहास व किस्से कहानियां नहीं है !


  ८.वेद ही ईश्वरीय वाणी है- इसका साक्ष्य स्वयं ईश्वर ने वेदों में किया है।


  ९.वेद सब प्रकार के अन्धविश्वास पाखंड पशुबलि पाषाण पूजा, मांसाहार, भूतप्रेत, जादूटोना आदि का समर्थक नहीं है


   १०.वेदों में शारिरिक आत्मिक व सामाजिक उन्नति के उपाय बताए गए हैं !


  ११.वेदों में कोई परिवर्तन नहीं-  वेद शाश्वत एकरस हैं !


  १२. वेद में ईश्वर जीव प्रकृति व सृष्टि का यथार्थ ज्ञान है !


  १३. वेद सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उनका आदि मूल है !


  १४. वेद पूरी मानव जाति का संविधान है ! वेद का पढ़ना-पढ़ाना  सुनना सुनाना व तदनुसार आचरण करना सब मनुष्यों का परम धर्म है !


  १५. वेद मनुर्भव, वसुधैवकुटुम्बकम्, कृण्वन्तोविश्वार्यम्, प्रेम, सदाचार, परोपकार,यज्ञ व योग का संदेश देता है !

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     वेद चार हैं - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद। वेद को सभी विद्वान  एकमत से सबसे प्राचीन मानते हैं। दुनिया में जितने भी पुराण कुराण बाईबल आदि धर्म ग्रन्थ माने जाते हैं वे सभी चार हजार वर्ष से पुराने नहीं है लेकिन वेद हर सृष्टि के आदि में ईश्वर द्वारा प्रगट किये जाते हैं !


     वर्तमान सृष्टि में वेद लगभग १,९६,०८,५३,१२३ वर्ष पूर्व प्रगट हुये । वेदों में सम्पूर्ण ज्ञान है- गणित विद्या, विमान विद्या, खगोल विद्या, आध्यात्मिक विद्या, संगीत विद्या, चिकित्सा विज्ञान, पारिवारिक, सामाजिक, वैश्विक व्यवहार का ज्ञान, मनुष्य के सम्पूर्ण कर्तव्य - अकर्तव्य का ज्ञान,  सम्पूर्ण पदार्थ विद्या, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान आदि। सभी विषयों का सम्पूर्ण ज्ञान अल्पज्ञ मनुष्य को नहीं हो सकता । ज्ञान विज्ञान से ओतप्रोत वेदमंत्रो की अद्भुत रचना सर्वज्ञ ईश्वर ही कर सकता है !


     सृष्टि के प्रारंभ में सबसे पुण्यशाली आत्माओं अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा नामक मनुष्यों को ईश्वर ने अपनी प्रेरणा शक्ति के माध्यम से उनके हृदयों में वेदों का ज्ञान दिया। जैसे चींटी को मीठा और नमकीन को पहचानने का ज्ञान, चिड़िया को घोंसला  बनाने का ज्ञान, गाय के नवजात बछड़े को तैरने का ज्ञान, पक्षीयों को उड़ने का ज्ञान, सभी पशु-पक्षी को ईश्वर ने प्रेरणा शक्ति से स्वाभाविक ज्ञान दिया हुआ है वैसे ही ईश्वर ने चार ऋषियों को वेदों का ज्ञान दिया !


    उन चारों ने दूसरों को सुनाया, और ऐसे सुनते-सुनाते ज्ञान आज लिपिबद्ध हो गया है। वेद ईश्वर कृत है इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि दुनियां में जितना भी विज्ञान सम्मत अच्छा व सच्चा ज्ञान है वह सभी वेद से ही लिया गया है । अतः यह निर्विवाद रुप से सत्य है कि सृष्टि के आदि में सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक ज्ञानस्वरूप परमेश्वर ने अपने शाश्वत ज्ञान- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को क्रमश: अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा के हृदयों में जनकल्याण हेतू प्रकाशित किया !


      सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर आज तक आर्य लोग दिन दिन गिनते और प्रसिद्ध करते चले आ रहे हैं और हर याज्ञिक कार्य में संकल्प कथन करते लिखते लिखाते रहे हैं जो बही खाते की तरह मान्य है । वेदों की उत्पत्ति परमेश्वर द्वारा ही होना वेदों में भी उल्लखित है :-


   तस्माद यज्ञात सर्वहुतः ऋचः सामानि जज्ञिरे।

   छन्दांसि जज्ञिरे तस्माद यज्ञुस्तस्मादजायत।। (यजुर्वेद ३१:०७)


  अर्थात उस सच्चिदानन्द, सब स्थानों में परिपूर्ण, जो सब मनुष्यों द्वारा उपास्य और सब सामर्थ्य से युक्त है, उस परब्रह्म से ऋग्वेद, यजुर्वेद सामवेद और छन्दांसि/अथर्ववेद ये चारों वेद उत्पन्न हुए।


     यस्मादृचो अपातक्षन् यजुर्यस्मादपकशन।

     सामानि यस्य लोमानी अथर्वांगिरसो मुखं।

     स्कम्भं तं ब्रूहि कतमःस्विदेव सः।। (अथर्व० १०.४.२०)


     अर्थात जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर है, उसी से (ऋचः) ऋग्वेद (यजुः) यजुर्वेद (सामानि) सामवेद (अंगिरसः) अथर्ववेद, ये चारों उत्पन्न हुए है ।


     यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः ।

     ब्रह्मराजन्याभ्या शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय ।।  

      - (यजुर्वेद २६.०२ ) 


    अर्थात परमेश्वर स्वयं कहता है कि मैने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र,अपने भृत्य वा स्त्रियादि के लिये भी वेदों का प्रकाश किया है; सब मनुष्य वेदों को पढ़ पढ़ा और सुन सुनाकर विज्ञान को बढ़ा के अच्छी बातों का ग्रहण और बुरी बातों का त्याग करके दुःखों से छूट कर आनन्द को प्राप्त हों।


    वेद की शिक्षाओं को सरल सरस भाषा व सार रुप में जानने के लिए महर्षि दयानन्द सरस्वती कृत ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका व सत्यार्थप्रकाश बहुत सहायक है ।


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🔥विश्व के एकमात्र वैदिक  पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

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 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ🕉🚩🙏


(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त)       🔮🚨💧🚨 🔮


ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये परार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- त्रिविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२३ ) सृष्ट्यब्दे】【 नवसप्तत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०७९ ) वैक्रमाब्दे 】 【 अष्टनवत्यधिकशततमे ( १९८ ) दयानन्दाब्दे, नल-संवत्सरे,  रवि- दक्षिणयाने शरद -ऋतौ, आश्विन -मासे ,कृष्ण  - पक्षे, -  चतर्दश्यां  तिथौ,  - मघा  नक्षत्रे, शनिवासरे तदनुसार  २४ सितम्बर , २०२२ ईस्वी , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे 

आर्यावर्तान्तर्गते.....प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ,  आत्मकल्याणार्थ,  रोग, शोक, निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे


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