आर्य-हिन्दुओं की एकता का सत्याग्रह- "दिल्ली का शिव मंदिर सत्याग्रह"

 आर्य-हिन्दुओं की एकता का सत्याग्रह- "दिल्ली का शिव मंदिर सत्याग्रह"

आज एक अपने आपको सनातनी कहने वाले कुछ अज्ञानी व्यक्ति आर्यसमाज और स्वामी दयानंद के विषय में बहुत असभ्य भाषा में लिख रहे हैं। 

मैं इस पोस्ट के माध्यम से अपने विचार उनके समक्ष रखना चाहता हूँ।

सबसे पहले तो स्वामी दयानंद ने हिन्दू समाज में फैली अन्धविश्वास रूपी गली सड़ी मानसिकता को छोड़ने का आवाहन किया था। दूसरे स्वामी जी ने वेदों के सन्देश को जनजागरण तक पहुँचाने का सन्देश दिया था। तीसरा इतिहास में स्वामी दयानंद पहले महापुरुष है जिन्होंने विधर्मियों कि मान्यता पर तर्कपूर्ण प्रहार करके उन्हीं कि भाषा में प्रतिउत्तर दिया था अन्यथा उससे पहले तो विधर्मी यही समझते थे कि हमारा कोई सानी नहीं हैं। 

हमारे पौराणिक भाइयों को इतिहास से एक ऐसी घटना को यहाँ पर दे रहा हूँ जिसमें आर्यों ने दिल्ली के शिव मंदिर की रक्षा हिन्दू समाज के प्रहरी के रूप में कि थी जबकि मूर्ति पूजा में उनका तनिक भी विश्वास नहीं था।

इस सत्याग्रह को "दिल्ली का शिव मंदिर सत्याग्रह" के नाम से जाना जाता हैं।

चाँदनी चौक दिल्ली में घंटाघर के पास एक छोटा सा शिव मंदिर था। कुछ शरारती मुसलमानों ने पुलिस एवं गोरी सरकार की मदद से उस मंदिर के शिव लिंग को चुरा लिया, मंदिर के पुजारी को डरा कर भगा दिया एवं मंदिर को अपवित्र कर दिया। दिल्ली के स्वयंभू पौराणिक नेताओं ने इस घटना का किसी भी प्रकार का प्रतिरोध नहीं किया। यह बात अगले दिन आर्य नेता लाला रामगोपाल शालवाले एवं लाला चतुरसेन तक पहुंची। दोनों ने इसे महत्वपूर्ण समझते हुए सत्याग्रह करने की घोषणा कर दी। पंडित व्यासदेव जी ने साथ दिया। इस सत्याग्रह की खबर अगले दिन पूरे देश में फैल गई एवं सम्पूर्ण देश में सरकार एवं शरारती तत्वों के विरुद्ध जबरदस्त रोष उत्पन्न हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने हस्तक्षेप करने का मन बनाया। मंदिर में पुन: मूर्ति की स्थापना हुई एवं भगवा ओम ध्वज लहराया गया।

आर्यसमाजी नेताओं विशेष रूप से लाला रामगोपाल एवं लाला चतुरसेन ने मूर्तिपूजा में विश्वास न होते हुए भी हिन्दू जागरण की भावना एवं हिंदुत्व की रक्षा के उद्देश्य से इस अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष किया और विजय श्री प्राप्त करी।

आज के सनातनी स्वामी दयानंद एवं आर्यसमाज द्वारा हिन्दू समाज के लिए किये गए महान कार्यों को भुलाकर कुछ मूर्खों की सिखाई में आकर व्यर्थ बयानबाजी करता हैं। ईश्वर उन्हें बुद्धि दे।

दूरियां घटाओ बढ़ाओ नहीं। 

संगठित होकर महान वेद की शिक्षाओं का अनुसरण करो। 

इसी में सभी कि भलाई  है।

(लाला चतुरसेन श्री मूलचंद गुप्ता जी के पिताजी एवं महान आर्य थे।)

श्री मूलचंद गुप्ता जी जनकपुरी दिल्ली में रहते हैं। उनका ईमेल एड्रेस है- ompratisthan@gmail.com


#डॉविवेकआर्य

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