आज का वेद मंत्र 🕉️

 🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️

🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷


दिनांक  - -    १० अगस्त  २०२२ ईस्वी 

 

दिन  - -  बुधवार 


  🌔 तिथि - - - त्रयोदशी ( १४:१५ तक तत्पश्चात  चतुर्दशी )


🪐 नक्षत्र -  - पूर्वाषाढ़ ( ९:४० तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ )


पक्ष  - -  शुक्ल 


 मास  - -  श्रावण 


ऋतु  - -  वर्षा 

,  

सूर्य  - -  दक्षिणायन


🌞 सूर्योदय  - - दिल्ली में प्रातः ५:४७ पर


🌞 सूर्यास्त  - -  १९:५ पर 


🌔 चन्द्रोदय  - -  १८:०२ पर 


🌔चन्द्रास्त  - -  २८:३१ + पर 


सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२३


कलयुगाब्द  - - ५१२३


विक्रम संवत्  - - २०७९


शक संवत्  - - १९४४


दयानंदाब्द  - - १९८


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 🚩‼️ओ३म्‼️🚩


    🔥धन के लिए हम दिनरात ध्यान देते है, पद और प्रतिष्ठा के लिए सुबकुछ करते रहते है,  मकान बनाते है, धंधे-व्यापार में मूडी लगाते है तो हम यह देखते है इसका आउटपुट क्या होगा, कितना रिटर्न मिलेगा, कितना लाभ मिलेगा, कब मिलेगा ? किन्तु हम अपना यह सूंदर लावण्यमयी शरीर, इंद्रिया, मन, बुद्धि आदि के बिषय में सोचते ही नहीं । ये सारे साधनो से प्रतिदिन १८ घंटे आउटपुट क्या और कितना आप ले रहो हो ? जरा सोचो । चक्षु, कर्ण आदि करणो का दुरपयोग तो नहीं हो रहा ? इसकी जांच-पड़ताल करनी क्या आवश्यक नहीं है ?


    वास्तविक उन्नति आतंरिक उन्नति है । अंदर से सुधार कर ले, सब सुधर जाएगा ।  अपनी पूरी आतंरिक स्थिति को केवल हम ही जान सकते है अथवा तो हमारा परमात्मा । हम बाहर से तो कितने अच्छे-भले-धार्मिक- सहिष्णु, दयालु, परोपकारी सभी को दिखाते है, परंतु अंदर से तो हम बिलकुल खोखले है, खाली है । बाहर से प्रेम दिखाते है, किन्तु अंदर से कितने स्वार्थी है-क्रूर है, दंभी है ? मन-वचन और क्रिया में कितना भेद कर रहे है हम ? आज भी विषयो के प्रति कितनी लोलुपता है, लालसा है, कामुकता है, कामना है, एषणा है, असंयम है ? बाहर से कितने ही हम अच्छे-सुखी-ऐश्वर्यवान लगते हो, परंतु अंदर से बुरे-दुःखी, पीड़ित और बहुत गरीब है । 


    बस....बहुत जी लिया जूठा जीवन, बहुत दिखावा कर लिया, बहुत शरीर को सजा दिया । बहुत धोखा दे दिया अपने निकटस्थ व्यक्ति को....। अब बाहर की आँख बंध कर ले और अंदर की आँख खोल ले । अपने में स्थित दोषो, कमियो को, अधर्म को, पाप को, वासनाओ को देख ले-पहचान ले और उसका प्रमाणिकता से स्वीकार कर ले । इतना करते ही पुरुषार्थ शुरू हो जाएगा । सुधार के लिए परमात्मा से सहयोग मांगे । संसारी लोग सहयोग करे या न करे, परंतु निश्चित परमात्मा पूरा सहयोग करेगा ही।


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🕉️🚩आज का वेद मंत्र 🕉️🚩


   🌷ओ३म् बृहन्निदिध्म एषां भूरि शस्तं पृथु: स्वरु:।येषामिन्द्रो युवा सखा।।(यजुर्वेद ३३/२४)


 💐 :- जिन महानुभाव भद्र पुरुषों ने, विषय भोगों में न फंसकर, महा तेजस्वी, सर्वव्यापक सूर्यवत् प्रतापी, एकरस, महाबली, सबसे बड़े परमेश्वर को, अपना मित्र बना लिया है, उन्हीं का जीवन सफल है। सांसारिक भोगों से विरक्त, परमेश्वर के ध्यान में और उसके ज्ञान में आसक्त, महापुरुषों के सत्संग से ही, मुमुक्षु पुरुषों का कल्याण हो सकता है, न कि विषय लंपट ईश्वर विमुखो के कुसंग से।


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 🔥विश्व के एकमात्र वैदिक  पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

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 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ🕉🚩🙏


(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त)       🔮🚨💧🚨 🔮


ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये परार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- त्रिविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२३ ) सृष्ट्यब्दे】【 नवसप्तत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०७९ ) वैक्रमाब्दे 】 【 अष्टनवत्यधिकशततमे ( १९८ ) दयानन्दाब्दे, नल-संवत्सरे,  रवि- दक्षिणयाने वर्षा -ऋतौ, श्रावण -मासे , शुक्ल  - पक्षे, -  त्रयोदश्यां - तिथौ,  - पूर्वाषाढ़  नक्षत्रे, बुधवासरे , तदनुसार  १० अगस्त, २०२२ ईस्वी , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे 

आर्यावर्तान्तर्गते.....प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ,  आत्मकल्याणार्थ, रोग, शोक, निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे


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