नए जमाने के भगवान

 नए जमाने के भगवान 

हिंदुओं को हर कुछ साल मे नए भगवान कि जरूरत पड़ती है। मार्केटिंग के नए तरीकों से हिंदुओं को उल्लू बनाया जाता है। इस जन्माष्टमी साईं बाबा के हाथ में श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र दिखाया। इससे पहले भी इस तरह की धृष्टता करते हुए श्रीराम, महादेव और विष्णु जी के स्थान पर साईं बाबा के चित्र लगाए गए।

हिन्दू चमत्कार के पीछे पागल होकर भागते हैं। निर्मल बाबा, राधे माँ, राम रहीम, रामपाल और न जाने कितने चमत्कारिक नौटंकीबाज इस तरह हमे मूर्ख बनाते हैं। गुजरात मे इसाइयों ने उंटेश्वरी माता का मन्दिर बना दिया और उसमे अविवाहित मैरी (Virgin Mary) की मूर्ति लगवा दी। हमारी इसी भेड़चाल से हम बर्बाद होते आए हैं और होते रहेंगे।  धर्म और अध्यात्म शिक्षण सिनेमा, टेलीविज़न और चमत्कार के अधीन हो गया।  

आज से 40-50 साल पहले कोई साईं का नाम तक न जानता था तब एक नया चलन सामने आया था कुछ लोग जो की साईं की मार्केटिंग कागज़ के पर्चे छपवा कर करते थे …उन पर लिखा होता था की अगर आप इस पर्चे को पढने के बाद छपवा कर लोगों में बांटेंगे तो दस दिन के अन्दर आपको लाखों रूपये का धन अचानक मिलेगा ।

….फलाने ने झूठ माना तो उसका सारा कारोबार ..खत्म हो गया और भिखारी हो गया

 1980 - 1990 के दशक यह बहुत चला था उसके बाद टी वी पर आने लगा, सीरियल बनाए जाने लगे ..फिल्में बनने लगी …..अमर अकबर अन्थोनी में सबसे पहले साईं के नाम एक गाना आया। एक  बुढिया की आँख साईं की कृपा से  ठीक हो जाती है। इसके बाद साईं की मार्केटिंग करने वालो ने  फिल्म बना ली जिसका परिणाम  कई सालो बाद यह हुआ कि साईं मंदिरों में बैठ चूका था

जब चैनल आये तब  2003 के बाद साईं के एक सीरियल आया जिसके बाद साईं की प्रसिद्धि बढ़ गयी, इस सीरियल में साईं की कई झूठी कहानियो का प्रचार करके साईं को प्रसिद्ध किया गया था। इस प्रचार का प्रभाव यह हुआ कि शिरडी का साई मन्दिर आय कि दृष्टि से भारत के मुख्य 10 मंदिरों मे गिना जाने लगा। 

इसका कारण हम हिन्दू हैं। हम जब तक सावधान नही होंगे यह धृष्टता जारी रहेगी।

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