आज का वेद मंत्र

 🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️

🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷


दिनांक  - -    ०४ अगस्त  २०२२ ईस्वी 

 

दिन  - -  गुरूवार


  🌓 तिथि - - -  सप्तमी ( २९:०६ तक तत्पश्चात अष्टमी )


🪐 नक्षत्र -  - चित्रा ( १६:४८ तक तत्पश्चात स्वाति )


पक्ष  - -  शुक्ल 


 मास  - -  श्रावण 


ऋतु  - -  वर्षा 

,  

सूर्य  - -  दक्षिणायन


🌞 सूर्योदय  - - दिल्ली में प्रातः ५:४४ पर


🌞 सूर्यास्त  - -  १९:१० पर 


🌓 चन्द्रोदय  - -  १०:३३ पर 


🌓चन्द्रास्त  - -  २२:३७  पर 


सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२३


कलयुगाब्द  - - ५१२३


विक्रम संवत्  - - २०७९


शक संवत्  - - १९४४


दयानंदाब्द  - - १९८


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 🚩‼️ओ३म्‼️🚩


   🔥महर्षि दयानन्द ने संसार में प्रचलित प्रायः सभी मतों की पुस्तकों की समीक्षा अपने विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘‘सत्यार्थप्रकाश” में की है। इस ग्रन्थ के उत्तरार्ध के चार अध्यायों में मत-मतान्तरों की पुस्तकों की समीक्षा कर उनमें विद्यमान कुछ असत्य मान्यताओं व कथनों से परिचित कराया गया है। असत्य को छोड़ना, सत्य का ग्रहण करना तथा सत्य को ही आचरण में लाना मनुष्य का कर्तव्य व धर्म कहलाता है।


     आर्यसमाज के अनुयायियों में यह गुण विशेष रूप से पाया जाता है। इसका कारण वेद एवं सत्यार्थप्रकाश सहित ऋषियों के प्राचीन ग्रन्थों उपनिषद, दर्शन आदि की सभी बातों का प्रायः सत्य पर आधारित होना है। हम भी इन ग्रन्थों को पढ़कर अपने विवेक एवं अन्य विद्वानों की समीक्षाओं से सत्य व असत्य का निर्णय कर सत्य का ग्रहण व असत्य का त्याग कर सकते हैं। ऋषि दयानन्द का धन्यवाद है कि उन्होंने मानव जाति को आर्यसमाज के श्रेष्ठ दस नियम दिये हैं जिनमें से एक चौथा नियम है ‘‘सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोड़ने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिये।” 


    यह मनुष्य जीवन में धारण करने योग्य आदर्श वाक्य है। इसे अपना लिया जाये तो हम अपने जीवन को उच्च व महान गुणों एवं आदर्शों वाला बना सकते हैं। ऐसा ही संसार में कुछ महापुरुषों एवं सभी वैदिक ऋषियों व मनीषियों ने किया था। वह वेदभाष्य, उपनिषद, दर्शन, शुद्ध मनुस्मृति तथा सत्यार्थप्रकाश आदि जो ग्रन्थ हमें प्रदान कर गये हैं उससे हमें सत्य का ज्ञान व सत्य के ग्रहण करने की प्रेरणा मिलती है और इनके अध्येता व हम सच्चे अर्थों में मननशील मनुष्य बनते हैं। ऐसे मनुष्यों का जीवन सत्य का ग्रहण व असत्य के त्याग का एक नमूना व उदाहरण होता है। 


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 🕉️🚩आज का वेद मंत्र 🚩🕉️


   🔥ओ३म् यदा वीरस्य रेवतो दुरोणे स्योनशीरतिथिराचिकेतत्।

सुप्रीतो अग्निः सुधितो दम आ स विशे दाति वार्यमियत्यै॥ (ऋग्वेद ७/४२\४ )


 💐 अर्थ:-  जब एक विद्वान मनुष्य के घर में अतिथि बनकर आता है। तो उसका भली प्रकार से सत्कार करना चाहिए। विद्वान जो ज्ञान का उपहार देगा उससे घर की समृद्धि और  आदर सम्मान बढ़ेगा।


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 🔥विश्व के एकमात्र वैदिक  पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

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 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ🕉🚩🙏


(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त)       🔮🚨💧🚨 🔮


ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये परार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- त्रिविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२३ ) सृष्ट्यब्दे】【 नवसप्तत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०७९ ) वैक्रमाब्दे 】 【 अष्टनवत्यधिकशततमे ( १९८ ) दयानन्दाब्दे, नल-संवत्सरे,  रवि- दक्षिणयाने वर्षा -ऋतौ, श्रावण -मासे , शुक्ल  - पक्षे, -  सप्तम्यां - तिथौ,  - चित्रा  नक्षत्रे, गुरूवासरे , तदनुसार  ०४ अगस्त, २०२२ ईस्वी , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे 

आर्यावर्तान्तर्गते.....प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ,  आत्मकल्याणार्थ,  रोग, शोक, निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे


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