शत्रुओं का नाश करो

शत्रुओं का नाश करो

परमपिता परमात्मा की कल्याणी वाणी श्रुति भगवती (वेद) ऋग्वेद ९/६३/५ की आज्ञा है कि "अपघ्नन्तो अराव्ण:" अर्थात् "शत्रुओं का नाश करो ।" अत:

मेरी आप सब आर्य जनों से यही विनति है कि चुप मत रहो प्रतिकार करो ।
शत्रु-नाशन एवं राष्ट्र रक्षा
अथर्ववेद।काण्ड:-१।सूक्त:-२१

●वि न इन्द्र मृधो जहि नीचा यच्छ पृतन्यत:।
अधमं गमया तमो यो अस्माँ अभिदासति।।१।।
हे राजन्!हमारे शत्रुओं को मार डाल।सेना लेकर हमला करने वाले शत्रु को दबा दे।जो हमे द्यात कर
दास बनाना चाहता हैं।उसका नाश कर दे,उसे दूर 
भगा दे।अन्धकार में पहुंचा दे।अर्थात राष्ट्र प्रशास-
निक अधिकारियों को देश के शत्रुओं को ढूढ निकालकर नाश कर देना चाहिए।

●वि रक्षो वि मृधो जहि वृत्रस्य हनूरूज।
वि मन्युमिन्द्र वृत्रहन्नमित्रस्याभिदासत:।।२।।
हे शत्रुनाशक राजन!तू हिंसकों और राक्षसो को मार डाल।तू घेर कर हमला करने वाले शत्रु के दोनो जबडो को तोड दे।हमारा नाश करने वाले शत्रु के 
उत्साह को नष्ट कर दे।अर्थात राष्ट्रद्रोहियों को मार
डालना चाहिए।

●अपेन्द्र द्विषते मनोऽप जिज्यासतो वधम्।
वि महच्छर्म यच्छ वरीयो यावया वधम्।।३।।
हे राजन! तू शत्रु के मन को बदल दे ताकि वह 
हमला करने का इरादा द्दोड दे।हम को नाश करने वाले को दूर कर दे।शत्रु के घात पात आदि दुष्कर्मो
को दूर कर और सब प्रजाओं को निर्भय कर सुख दे।
अर्थात राष्ट्र का मनोबल और सैन्य शक्ति इतनी होनी
चाहिए कि शत्रु हमला करने का साहस न कर सके 
और यदि करे तो शत्रु का सदेव के लिए नष्ट कर देवें।

●यूयमुग्रा मरूत: पृश्रिनमातर इन्द्रेण युजा मृणीत
शत्रून।
सोमो राजा वरूणो राजा महादेव उत मृत्युरिन्द्र:।।४।।
हे राष्ट्रभूमि को माता मानने वाले एवं मरने के लिए 
सिद्ध हुए वीरो,शूर सेनापति के साथ रहकर शत्रुओं
को मार डालो ।सोम,वरूण,महादेव,मृत्यु और इन्द्र
अादि देव सब शूरवीरों को सहायता करने वाले हैं।
अर्थात तेजस्वी शूरवीरो की देवता भी सहायता करते है।

●सबन्धुश्चासबन्धुश्च यो अस्माँ अभिदासति।
सर्व तं रन्धयासि मे यजमानाय सुन्वते।।६।।
जो शत्रु अपने साथी भाइयों सहित या अकेले
हमारा विनाश करना चाहता हों,उनका नाश करो
अर्थात राष्ट्र शत्रु रहित होकर सब प्रकार उन्नति करे।
ओ३म्
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