‌बोलना बहुत खतरनाक काम है। बहुत सोच समझकर बोलना चाहिए।


‌बोलना बहुत खतरनाक काम है। बहुत सोच समझकर बोलना चाहिए।
       जब तक आपका विचार आपके मन में रहता है, तब तक वह आपका है, और उसका प्रभाव भी आप तक ही सीमित रहता है। परंतु जब आप कुछ बोलने लगते हैं, तो वह विचार केवल आप तक सीमित नहीं रहता। उसे सुनने वाला भी उस विचार से प्रभावित होता है। 
        यदि आपके द्वारा बोली गई बात को सुनकर दूसरे व्यक्ति पर अच्छा प्रभाव पड़ा, तो वह आपसे प्रसन्न हो जाएगा। यदि आपकी बात का उस पर प्रभाव अच्छा नहीं पड़ा, तो वह आप से दुखी एवं नाराज हो जाएगा। बात यहीं तक सीमित नहीं रहेगी। विज्ञान का नियम है कि एक्शन का रिएक्शन भी होता है। अर्थात् जब कोई क्रिया होती है, तो उसकी प्रतिक्रिया भी होती है। इसलिए जब दूसरा व्यक्ति आपकी बात को सुनकर दुखी एवं नाराज हो जाएगा, तो उसकी प्रतिक्रिया यह होगी, कि वह आपके विरुद्ध कुछ न कुछ कार्यवाही भी करेगा। चाहे वह आपके दोष दूसरों को बतलाए। चाहे आप पर झूठे आरोप लगाए। चाहे आपके काम बिगाड़े और आपको परेशान करे। चाहे आप की सुविधाएं कम कर देवे, आपकी सेवा न करे। आपके साथ झगड़ा करे। कुछ भी प्रकार की प्रतिक्रिया हो सकती है। इसलिए इस बात का ध्यान अवश्य रखें, कि आप जो बोलने जा रहे हैं, उसका दूसरे लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
         यह बात भी महत्वपूर्ण है, कि आप किससे बात कर रहे हैं? जिससे आप बात कर रहे हैं, यदि वह कोई आपका निकट व्यक्ति है, परिवार का ही सदस्य है,  अथवा कोई रिश्तेदार संबंधी है, अथवा पड़ोसी है, या कोई मित्र है; तो इस प्रकार से जो निकट संबंधी हैं, उनके साथ बात करते समय तो विशेष सावधानी रखनी होगी। क्योंकि कल जब आपके ऊपर कोई आपत्ति आएगी, कोई समस्या आएगी,  तब इन्हीं निकट संबंधियों में से ही कोई व्यक्ति आपकी सहायता करेगा। यदि आपने इनको नाराज कर दिया, तब वह उसकी प्रतिक्रिया अवश्य दिखाएगा। इसलिए बहुत सावधानी से बात करें।
         जिन दूसरे बाहर के लोगों से आपको नगर में सड़क पर रेल में बस में या कार्यालय में बात करनी पड़ती है, वहां भी सावधान अवश्य रहें। वे लोग भले ही आप के सुख-दुख में इस प्रकार से काम नहीं आएंगे, जैसे कि मित्र संबंधी रिश्तेदार आदि। फिर भी, यदि आपने उनके साथ भी कोई झगड़ा कर लिया, कोई विवाद उत्पन्न कर लिया,  तो वे भी इसकी कुछ न कुछ प्रतिक्रिया तो अवश्य ही करेंगे। इसलिए उनके साथ बात करते समय भी यह ध्यान रखा जाए, कि उनके साथ भी कोई विवाद या लड़ाई-झगड़ा आदि न हो। और चुपचाप वहां से काम निपटा कर, आप अपने घर की ओर निकल लेवें। झगड़ा करने में किसी को भी आज तक न कुछ लाभ हुआ, न होगा।
          हां, एक जगह आपको जरूर जमकर बोलना पड़ सकता है, जहां आप दूसरों के नाराज होने की अधिक परवाह नहीं करेंगे। और वह जगह है, जब आप किसी सभा में बैठे हों, और वहां समाज के लिए कुछ नियम कानून बनाए जा रहे हों। यदि उस सभा में दूसरों पर अन्याय करने के नियम कानून बनाए जा रहे हों, तब आप को वहां चुप नहीं रहना चाहिए। वहां तो आपको सत्य और न्याय के पक्ष में ही बोलना चाहिए। और निर्भीकता पूर्वक बोलना चाहिए। वहां पर किसी के नाराज़ होने की चिंता नहीं करनी चाहिए। यदि आपकी उपस्थिति में वहां गलत कानून पास हो गए, तो उसका दोष उन लोगों के साथ साथ आपको भी लगेगा, और आपको भी उसका दंड भोगना पड़ेगा। 
       तो ऐसी स्थिति में जब आपको पहले से पता चल जाए, कि इस सभा में कुछ ग़लत कानून पास किये जाएंगे। तब या तो आप उस सभा में जाएं ही नहीं, और यदि जाएं तो फिर सत्य न्याय पक्ष का ही समर्थन करें। यही मनुष्यता है। तब उससे होने वाली हानि की चिंता न करें। कुछ न कुछ हानि तो आपको संसार में  उठानी ही पड़ेगी, क्योंकि आपने संसार में  जन्म लिया है। उसके लिए तैयार रहें। यहां सब लोगों के विचार संस्कार बुद्धि एक जैसी नहीं है। कहीं न कहीं तो टकराव होगा ही, और उसकी हानि भी आपको सहन करनी पड़ेगी।
- स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक


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