आज का संकल्प पाठ

ओ३म् सादर नमस्ते जी 



दिनांक  - - ०३ सितम्बर २०२०
दिन  - -गुरूवार
तिथि  - - प्रतिपदा 
नक्षत्र  - - पूर्वाभाद्रपद 
पक्ष  - -कृष्ण
माह  - -  आश्विन 
ऋतु  - - शरद 
सूर्य  - - दक्षिणायन 
सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२१
कलयुगाब्द  - - ५१२१
विक्रम संवत  - - २०७७
शक संवत्  - - १९४२
दयानंदाब्द  - - १९६


 


  


    हमको ईश्वर पर बिना शर्त अटल विश्वास रखकर शुभ कर्म करना चाहिए ताकि हम जीवन यात्रा को सफलता और श्रेष्ठता के साथ पार कर सकें। यह आत्मा ऐसा सिर्फ़ मनुष्य योनि में ही कर सकती है और यह मानुष तन बड़े भाग्य से ही मिलता है। 


    हमें जगत् के स्वामी को ऐसे ही सदा स्मरण करते रहना चाहिए जैसे सिर पर जल भरी गागर रख कर चलने वाली पनिहारी बातें करती हुई और राह चलती हुई भी किसी भी क्षण यह नही भूलती कि उसके सिर पर जल भरी गागर रखी हुई है। उसे प्रतिपल गागर का स्मरण बना रहता है। जिससे वह ऐसा सन्तुलन साधे रखती है कि हाथ से पकड़े न होने पर भी गागर गिरती नही।


     इन्द्रियों का निग्रह करते हुए मन को विवेक तथा धैर्य से वश में रखकर ही उचित कर्म किये जा सकते है, जैसे घोड़े की लगाम वश में रखकर और सही मार्ग का ज्ञान होने पर ही हम सही रास्ते पर चल सकते है। 


    फल के प्रति आशक्ति न रख कर अपने कर्म को अपना धर्म समझकर जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करता रहता है।ऐसा व्यक्ति कर्म करता हुआ भी कर्म कर्मों के बन्धन्न में नही बंधता और दुःखों से बचा रहता है ।


 


 यदा संहरते चायं कूर्मोऽगानीव सर्वश:।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठता।।( गीता )


  अर्थ:-  जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को सब ओर से समेट लेता है ,उसी भाँति जो पुरुष अपनी सभी  इन्द्रियों को इन्द्रियविषयों से हटा लेता है, तब उसकी बुद्धि स्थिर हो जाती है  अर्थात् वही यथार्थ में परम ज्ञानी है।


 


  आज का संकल्प पाठ 
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(सृष्टि संवत् - संवत्सर-अयन - ऋतु- मास-तिथि- नक्षत्र)



           ओं तत्सद्।श्री व्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे सप्तमे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे ,{ एकोवृन्दः षण्णवतिकोटि: अष्टलक्षानि त्रिपञ्चाशत्सहस्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२१) सृष्टिसंवत्सरे } { पच्चसहस्स्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( ५१२१ ) कलियुगे } { सप्तसप्तत्युत्तर द्विसहस्रतमे ( २०७७) विक्रमसंवत्सरे } {षण्णवत्यधिकशततमे (१९६) दयानंद संवत्सरे }  रवि दक्षिणायाने, शरद ऋतौ, आश्विन मासे, कृष्ण पक्षे, प्रतिपदा तिथि, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रे, गुरूवासरे तदनुसार ०३ सितम्बर २०२०
जम्बूद्वीपे,  भरतखण्डे आर्यावर्त्तान्तरगते .........प्रदेशे ,........जनपदे.. ..नगरे......गोत्रोत्पन्नः....श्रीमान. (पितामह)....(पिता)...पुत्रस्य... अहम् .'(स्वयं का नाम)....अद्य  प्रातः कालीन वेलायाम्  सुख शांति समृद्धि हितार्थ ,आत्मकल्याणार्थ ,रोग -शोक निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे।🇮🇳 जय भारत


samelan, marriage buero for all hindu cast, love marigge , intercast marriage , arranged mar


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