मनुष्य जन्म क्यों लेता है

प्रश्न  :- मनुष्य जन्म क्यों लेता है ?


🌷 उत्तर  :- न्यायदर्शन का यह सूत्र इस शंका का समाधान करता है ।


दु:ख -जन्म  - प्रवृत्ति - दोष - मिथ्याज्ञानम्
उत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्ग: ( न्यायदर्शन १\२ )


   मनुष्य के जन्म का मुख्य कारण है उसके पूर्व  -संस्कार और शेष संचित कर्म। अज्ञानता के कारण दोष उत्पन्न होते है और दोष के कारण प्रवृत्ति बनती है। यही प्रवृत्ति जिस के कारण जन्म होता है। और सब दु:खों का कारण जन्म ही है।  जब तक अज्ञानता दूर नही होगी यह जन्म  -मरण का अनादि चक्र चलता ही रहेगा। अज्ञानता  ( अविद्या अंधकार ) के हटने पर ही मुक्ति मिलती है 


       मनुष्य स्वयं जन्म नही लेता।  ये उसके कर्म ही उसे जन्म लेने पर विवश करते हैं  ! जन्म कब - कहाँ- कैसे होना है यह मनुष्य के बस में नही है। ईश्वर ही सर्वज्ञ है , न्यायकारी है। मनुष्य के वर्तमान जीवन में किये कर्मों के आधार पर तथा पूर्व जन्मों के सिंचित कर्मानुसार ईश्वर  - व्यवस्था में मनुष्य को जन्म मिलता है । मनुष्य अगर वर्तमान में अपने कर्मो पर ध्यान दे तो वह अपने कर्मो में सुधार लाकर और ईश्वर की उपासना से सद्ज्ञान की प्राप्ति करके मोक्ष का भागी बन सकता है और जन्म- मरण के बन्धनों से मुक्त हो सकता है। 


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