क्या आप कभी चिकन के दुकान में गए हैं

क्या आप कभी चिकन के दुकान में गए हैं ???


अगर गए हैं तो अच्छा है और अगर नहीं गए हैं तो कभी जाकर देखिएगा.


चिकन के दुकान में बहुत सारे मुर्गे एक बड़ी डलिया में बंद रहते हैं और अपना दाना चुगने में मस्त रहते हैं.


जब ग्राहक के कहने पर दुकानदार डालिये में हाथ डालकर किसी मुर्गे को काटने के लिए निकालता है तो... सिर्फ वही मुर्गा फड़फड़ाता है, जिसे पकड़ा गया है.


डलिए में मौजूद बाकी मुर्गे... एक नजर उस फड़फड़ाते हुए मुर्गे को देखते हैं...
और, फिर अपना दाना चुगने में व्यस्त हो जाते हैं.


फिर, इसी तरह... डलिए के सभी मुर्गे की बारी आती है और एक समय ऐसा आता है जब डलिए के सारे मुर्गे निवाला बन जाते हैं....!


अपना हिंदु समाज वही डलिए वाला मुर्गा है... जो पकड़े जाने वाले मुर्गे को एक नजर देखता है और फिर अपना दाना चुगने में व्यस्त हो जाता है.


आप पूरे सोशल मीडिया में देख लें...


सोशल मीडिया... हमारे हिंदु समाज की सबसे वास्तविक प्रतिकृति है.


अभी बैंगलोर में हमले की घटना को 48 घंटे भी नहीं बीते हैं कि... 
सभी मुर्गे ... दाना चुगने... 
अर्थात, एक दूसरे को जन्मदिन की बधाइयाँ देने.. "NICE DP" ... और, शेरो शायरी में मस्त हो गए हैं.


लगभग यही हाल.... दिल्ली दंगों और पालघर में हमारे साधुओं की हत्या के बाद भी हुआ था.


जबकि... आपने खुद ही देखा होगा कि... अखलाक और साइकिल चोर तबरेज की हत्या के बाद किस तरह सोशल मीडिया को महीनों तक रंग दिया गया था.


नेशनल से लेकर इंटरनेशल मीडिया और संयुक्त राष्ट्र संघ तक में उसकी गूंज सुनाई देने लगी थी.


लेकिन, हमारा हिदू समाज "फॉर्म वाला वो मुर्गा" है... जिन्हें किसी से कोई मतलब नहीं है.


उन्हें न तो अपने समाज से कोई मतलब है न ही धर्म से और न ही अपनी सिकुड़ते क्षेत्र से.


वो तो मस्त है सिर्फ दाना चुगने में...!


कहीं कोई घटना हुई तो... धारा में बहकर एक दो दिन उस बारे में पोस्ट किए ... उसके लाइक गिने..
फिर, पुराने पैटर्न पर लौट गए.


क्या आपने कभी सोचा है कि... ये जो तुरत में 1000-1200 की भीड़ जमा हो जाती है .... वे कौन हैं और कहां से आते हैं ???


वे क्या विदेश से आते हैं या मंगलग्रह से ???


जी नहीं.... वे सब आपके आसपास ही रहते हैं...!


इन 1000-1200 की भीड़ में आपका वो अब्दुल है.. जिससे आप पंचर बनवा कर उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत करते हैं.
वो करीम है... जिससे आप सब्जियां और फल खरीद कर उसे बिजनेस देते हैं.
वो असलम है... जिससे आप ac और फ्रिज ठीक करवा कर मनमाना पैसे देते हैं.
वो शाहिद है जिससे... अपने कपड़े सिलवा कर... उसे पैसे देते हैं.


आपने उन्हें मजबूत किया... उनके लात को मजबूत किया...
तो... वो लात तो आपको पड़ना ही है.


कोरोना काल में... उनके आर्थिक बहिष्कार का बहिष्कार जोर-शोर से चलाया...


क्या हुआ 🛎 ????


दो दिन हल्ला मचाए... पोस्ट किए.. लाइक गिने..


और... फिर वही... असलम भाई, अब्दुल भाई, करीम चाचा करना शुरू हो गया..


हद तो है कि... शाहीन बाग, मरकट, और दिल्ली दंगों को अभी 6 महीने भी नहीं हुए हैं..


लेकिन.... आज भी आपको सैकड़ों और हजारों बेवकूफ इसी सोशल मीडिया में प्रवचन देते मिल जाएंगे कि.... 
उस आहत इंदौरी के बारे में गलत मत बोलो.. काहे कि उ मर गया है और मरे हुए के बारे में गलत बोलना हमारी परंपरा नहीं है.  8109070419


अच्छी बात है... नहीं बोलेंगे...


क्योंकि.... किसी कमीने को गाली देना हमारी परंपरा नहीं है...


तो फिर हमारी परंपरा क्या है ???


सबसे गाली सुनना और लात खाना ???


उसी परंपरा का निर्वहन करवाना चाहते हैं हम सब से ???


क्या ऐसे लुंच-पुंज और लिजलिजाती इच्छा शक्ति के भरोसे आप लड़ना चाहते हैं उनसे...
जो पूर्ण रूपेण संगठित हैं और आपको निगल जाना चाहते हैं ???


जहाँ तक खुद में मस्त रहकर दाना चुगने और सेहत बनाने (पैसा कमाने) की बात है तो एक बात हमेशा याद रखना कि...


मुर्गा दाना चुग चुग के खूब प्रोटीन बनाता है और मोटा ताजा हो जाता है.


अंत में उसे पकड़ कर आप मुर्गा-भात खा लेते हो.


और हाँ.... जबतक सुधरोगे नहीं और लड़ने का जज्बा नहीं लाओगे..
मोदी तो क्या... साक्षात भगवान भी तुम्हें नहीं बचा सकते हैं.


क्योंकि... महाभारत के युद्ध में भी भगवान श्रीकृष्ण सारथी थे..
युद्ध तो लड़े... कौरव और पांडव ही थे.
......
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आप जरूर सोए हुए हो... 
लेकिन, 


आपके दुश्मन कदापि नहीं.।।


samelan, marriage buero for all hindu cast, love marigge , intercast marriage , arranged mar


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