दूसरों पर अत्याचार न  करें।

2.9.2020


 दूसरों पर अत्याचार न  करें। ईश्वर जब दंड देगा, तब समझ में आएगा कि आपने भारी गलती की है।


      आपने बहुत सी फिल्में सीरियल    नाटक आदि देखे होंगे, और इतिहास भी आप जानते हैं। इन सब में यही दिखाया जाता है, कि जो खलनायक (विलेन) होता है, वह अपनी संपत्ति, गैंग और ताकत के नशे में चूर होकर, कमजोर गरीब बेबस लोगों पर अत्याचार करता रहता है। कहीं कहीं कोई अधिकारी व्यक्ति  अपने अधिकार का दुरुपयोग करके  दूसरों  को परेशान करता है। चाहे रावण हो कंस हो दुर्योधन हो शिशुपाल हो या जो भी कोई हो, ये सारे खलनायक और इन जैसे और भी दुष्ट लोग, हमेशा कमजोर लोगों को सताते रहे हैं। दुष्टों की यही परंपरा आज भी बनी हुई है। परंतु श्री कृष्ण, श्री राम आदि, या फिल्मी नायकों (हीरोज़) से, जब ये खलनायक पिटते हैं, तब अंत में ये हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं, कि "हमें माफ कर दो, हमसे गलती हो गई।" अथवा न्यायालय में यदि केस हार जाएं, तो न्यायाधीश महोदय से भी माफी मांगते हैं, कि "हमें माफ कर दिया जाए।"


         तब नायक और न्यायाधीश उन्हें माफ नहीं करते। माफ कर भी नहीं सकते, और करना भी नहीं चाहिए। क्योंकि यदि एक-दो को माफ किया, तो उनको देखकर और लाखों लोग बिगड़ जाएंगे। वे सब भी खलनायक बनेंगे। क्योंकि उन्हें विश्वास हो जाएगा कि जैसे इस खलनायक को न्यायालय से माफी मिल गई, तो ऐसे ही हमें भी मिल जाएगी। 
       बस यही एक सूत्र है, जो समझने का है। जिसको यह दंड का सूत्र समझ में आ गया, कि जब मैं अपराधी सिद्ध हो जाऊंगा, तब मुझे कोई न्यायालय माफ नहीं करेगा। हो सकता है, मानवीय जेल में मेरे अच्छे व्यवहार को देखकर बाद में दंड की मात्रा थोड़ी कम भी कर दी जाए, फिर भी पूरी तरह से तो माफी नहीं मिलेगी। और ईश्वर के न्यायालय में तो दंड कम भी नहीं होगा। जिस व्यक्ति को यह दंड व्यवस्था 100% समझ में आ जाती है,  वह व्यक्ति फिर गलती नहीं करता। किसी पर अन्याय अत्याचार शोषण नहीं करता। जैसे जिसको यह बात 100% समझ में आ जाती है, कि बिजली की तार को छूने से मृत्यु हो सकती है। तो वह व्यक्ति बिजली की तार को कभी नहीं छूता।
     अब सोचिए, संसार में ऐसे कितने लोग हैं, जिन्हें यह दंड व्यवस्था समझ में आती है। बहुत ही कम, गिने चुने लोग ही दंड को समझते हैं। बस इतने ही लोग सुधरते हैं। बाकी सब लोग दंड को न समझने के कारण, अवसर मिलते ही अन्याय शोषण अत्याचार आदि पाप कर्म करते हैं। गरीब कमजोर को परेशान करते हैं। उसकी मजबूरी का गलत फायदा उठाते हैं। इन सब को ईश्वर का दंड समझ में नहीं आता। इसलिए ये लोग ऐसा करते हैं।
     कृपया ईश्वर के दंड को समझने का प्रयत्न करें। अपने आसपास चिड़ियाघर में जंगल में नदी में समुद्र में डिस्कवरी चैनल पर ध्यान पूर्वक देखें, कि साँप बिच्छू शेर भेड़िये सूअर कुत्ते गधे ह्वेल मछली मगरमच्छ वृक्ष आदि कितने विचित्र प्राणी ईश्वर ने बनाए हैं। ये सब प्राणी, वही खलनायक हैं, जो पिछले जन्मों में गरीब कमजोर बेबस लोगों पर अत्याचार करते रहे हैं। आज वे खलनायक, साँप बिच्छू सूअर मछली वृक्षादि योनियों में भयंकर दुख भोग रहे हैं। यह ईश्वर द्वारा दिया गया दंड है।
     ईश्वर के इस दंड को समझ कर अत्याचार करने से बचें। सबसे बड़ा न्यायाधीश ईश्वर है। जब कोई खलनायक  उससे माफी मांगेगा, तो ईश्वर भी उसकी बात नहीं सुनेगा। जैसे खलनायक उस कमजोर गरीब बेबस व्यक्ति की दया की पुकार नहीं सुनता। दोनों में अंतर यह है कि, खलनायक तो अत्याचार करता है, जबकि ईश्वर न्याय ही करेगा।
 - स्वामी विवेकानंद परिव्राजक


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