धैर्य का फल मीठा होता है।


 


पुरानी कहावत है, "धैर्य का फल मीठा होता है।" आज भी इस कहावत की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी पहले थी।
       आपने देखा होगा कुछ लोग बड़े धैर्यशाली होते हैं। और कुछ लोग बड़े उतावले या जल्दबाज होते हैं। वे हर काम में जल्दी करते हैं। और अनेक बार ऐसा भी देखा जाता है कि वे जितनी अधिक जल्दी करते हैं, उतनी ही उनसे गलतियां अधिक होती हैं। गलतियां अधिक होने से उनके काम उतनी ही देर से होते हैं और बिगड़ते जाते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें क्रोध आता है। क्योंकि वे गलतियां उन्होंने स्वयं की हैं, अपनी जल्दबाजी के कारण ही उनका काम विलंब से हुआ, इसलिए वे स्वयं पर  झल्लाने लगते हैं। स्वयं पर ही गुस्सा करते हैं। ऐसा करना उचित नहीं है। 
        इन सारी गलतियों से और झल्लाहट से यदि व्यक्ति चाहे तो बच सकता है। थोड़ा धैर्य को धारण करना होगा। जल्दबाजी को कम करना होगा। सुबह उठते ही सबसे पहला संकल्प यही करें, कि "मैं सब काम धैर्यपूर्वक करूंगा, किसी भी काम में जल्दबाजी नहीं करूंगा." प्रतिदिन इस प्रकार से संकल्प करने से आपके मन पर धैर्य से काम करने का संस्कार पड़ेगा। धीरे-धीरे यह संस्कार बलवान होता जाएगा और आप दिनभर की क्रियाओं को धैर्य से करेंगे। जल्दबाजी नहीं करेंगे। इसका परिणाम यह होगा कि - आप की गलतियां कम होती जाएंगी। जैसे-जैसे गलतियां कम होती जाएंगी, वैसे-वैसे झल्लाहट और क्रोध भी कम होता जाएगा। आपको शांति मिलेगी। आपके सारे कार्य अच्छी प्रकार से संपन्न होंगे। बुद्धि भी ठीक रहेगी। बुद्धि के ठीक रहने से आप दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार भी करेंगे।
      एक बात और है। जब हम कहते हैं कि धैर्य का पालन करें। सब काम शांति से सोच समझ कर करें। तो बहुत से लोग कहते हैं, कि साहब यह हमसे हो नहीं पाता। धैर्य रखना बहुत कठिन है।
       ठीक है, हम मान लेते हैं, कि धैर्य रखना कुछ कठिन है, परंतु असंभव नहीं है। इसमें थोड़ा कष्ट तो होता है। परंतु यह भी तो सत्य है, कि बिना कष्ट उठाए कोई सुख भी तो नहीं मिलता। 
       ऋषि लोग कहते हैं, भले ही धैर्य रखना कष्टकारक है, धैर्य का बीज और वृक्ष भले ही कड़वा है, परंतु जब इस वृक्ष पर फल आते हैं, तो बहुत मीठे होते हैं। आप सोचेंगे, कड़वे बीज और वृक्ष पर मीठे फल कैसे आएंगे? तो स्वयं परिक्षण कर लीजिए। आम का बीज खाकर देखिए, वृक्ष को थोड़ा तोड़कर खा कर देखिये, कड़वा लगेगा। लेकिन उस वृक्ष पर आम के फल बहुत मीठे आते हैं। 
      बीज एवं वृक्ष तो प्रायः कड़वे ही होते हैं। परंतु जब वृक्ष बड़ा हो जाता है और फल पूरा पक जाता है, तब उसमें ईश्वर की व्यवस्था से मिठास उत्पन्न हो जाती है। इसलिए मीठे फल खाने के लिए धैर्य का थोड़ा कड़वा बीज और वृक्ष भी अपने अंदर धारण करना पड़ेगा। कुछ समय बाद बहुत अच्छे मीठे फल खाने को मिलेंगे, अर्थात् परिणाम बहुत सुखदायक होंगे।
       कुल मिलाकर सार यह हुआ, कि धैर्य को धारण करने से, आप स्वयं भी सुखी रहेंगे और दूसरों को भी सुख देंगे। न आपके काम बिगड़ेंगे, और न दूसरों के। इसलिए थोड़ी सावधानी रखने की आवश्यकता है। धैर्य से सब काम करें, जल्दबाजी न करें।
- स्वामी विवेकानंद परिव्राजक


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