श्री रामचन्द्र जी को श्रद्धापूर्वक नमन है

 



 


 


 


 


 


श्री रामचन्द्र जी को श्रद्धापूर्वक नमन है


महर्षि वाल्मीकि द्वारा इक्ष्वाकुवंश में उत्पन्न मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी के गुणों के बारे में पूछे जाने पर नारद मुनि उनके व्यक्तित्व के बारे में विस्तार से बताते हैं कि राम नियतात्मा( अंतःकरण को वश में करने करने वाला) ,महावीर्य, श्रुतिमान्,धृतिमान्, बुद्धिमान्,नीतिमान्, वाग्मी, श्रीमान्,धर्मेंद्र,प्रजा हित में रत, यशस्वी, ज्ञानसंपन्न,पवित्र तथा राम के शरीर सौष्ठव का वर्णन करते हुए उन्हें दीर्घ स्कन्ध, महाबाहु, पुष्टगर्दन वाले, बड़ी ठुड्डी युक्त, आजानुबाहु, विकसित वक्षस्थल युक्त तथा बड़ी बड़ी आंखों वाला तथा श्रीयुक्त हैं , शत्रु विनाशक हैं, समस्त प्राणियों के रक्षक हैं, वह धर्म के संरक्षक तथा आश्रित जनों के त्राणकर्ता हैं,उन्होंने वेदों और व्याकरण आदि वेदांगों के तत्वों को भलीभांति हृदयंगम किया है तथा धनुर्विद्या में वे निष्णात् हैं, सब शास्त्रों के तत्वों को जानने वाले तथा अद्भुत स्मृति और प्रतिभा के धनी वे धैर्य में हिमालय के तुल्य, गंभीरता में समुद्र के समान, बल में विष्णु के समान, चंद्र के तुल्य प्रियदर्शन राम यदि कुसुम के समान कोमल स्वभाव वाले हैं तो वज्र तुल्य कठोर भी हैं ,जब वे शत्रुओं पर कुपित होते हैं तो उनका क्रोध कालाग्नि के तुल्य दीख पड़ता है किंतु उनके क्षमाशीलता की भी कोई सीमा नहीं है वे सर्वसहा पृथ्वी की भांति क्षमावान् हैं, दानशीलता में कुबेर के तुल्य तथा सत्याचरण में तो अपर धर्म के तुल्य हैं ।


ऐसे सब लोकप्रिय,साधु स्वभाव वाले तथा दीनता से रहित राम को संक्षेप में कहें तो राम आर्यआदर्शों के प्रतीक हैं जो सदा उज्जवल नक्षत्र की भाँति मानवजाति को सतत प्रेरित करते रहेंगें।ऐसे लोकोत्तर महामानव को श्रद्धापूर्वक नमन है!!! 


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