दूसरे लोगों से तुलना भले ही करें, परंतु  ऐसे न करें, कि आप अवसाद की स्थिति में चले जाएं।

 



 


 


 


       दूसरे लोगों से तुलना भले ही करें, परंतु  ऐसे न करें, कि आप अवसाद की स्थिति में चले जाएं। अपने विशेष गुणों को पहचानें, और उनका लाभ उठाएं।
         आपने अनेक बार सुना होगा कि दूसरों के साथ अपनी तुलना न करें, यह सिद्धांत ठीक नहीं है। क्योंकि तुलना के बिना तो व्यक्ति जी ही नहीं सकता।
       तुलना करने से व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। उदाहरण - एक कक्षा में 50 विद्यार्थी पढ़ते हैं। कुछ विद्यार्थी पढ़ाई में तेज होते हैं, उनकी बुद्धि अच्छी होती है। वे परीक्षा में अच्छे अंक लाते हैं। उनके आसपास के विद्यार्थी उनसे कुछ कम अंक लाते हैं। वे तेज विद्यार्थियों के साथ अपनी तुलना करते हैं, तो उन्हें भी उत्साह मिलता है। कि दूसरा विद्यार्थी यदि 100 में से 90 अंक लाता है और मेरे 80 अंक आते हैं, तो मुझे भी और अधिक परिश्रम करना चाहिए,  जिससे मैं भी और आगे बढ़ूँ। 
      तो इस प्रकार से सोचने पर तुलना करने से पढ़ाई में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।  और व्यक्ति अधिक परिश्रम करके पढ़ाई में उन्नति करता है। इस प्रकार से तुलना करना उचित है।
          दूसरा उदाहरण - परंतु ऐसे सोचना गलत है कि दूसरे विद्यार्थी के 100 में से 90 अंक आते हैं, मेरे तो 60 ही आते हैं. मैं तो कुछ नहीं कर सकता। मैं तो आगे नहीं बढ़ सकता। मैं 90 अंक वाले को हरा नहीं सकता। इसलिए मैं कुछ ऐसा करूंगा कि 90 वाला अंक वाला विद्यार्थी भी मुझसे पीछे रह जाए। मैं उसकी पढ़ाई खराब करूंगा, जिससे कि उसके 50 / 55 अंक ही आवें, और वह मुझसे हार जावे।
      इस प्रकार से तुलना करना गलत है। ऐसा नहीं करना चाहिए। ऐसी तुलना करने से तुलना करने वाले विद्यार्थी की उन्नति तो होगी नहीं, बल्कि वह पाप कर्म की ओर प्रेरित अवश्य हो जाएगा। 
            ऐसी तुलना करने से वह विद्यार्थी या तो तीव्र बुद्धि वाले विद्यार्थी का नुकसान करेगा, जो कि गलत है। और यदि वह तीव्र बुद्धि वाले विद्यार्थी का नुकसान न भी कर पाया, तो स्वयं अवसाद या डिप्रेशन की स्थिति में चला जाएगा। यह स्थिति अत्यंत हानिकारक है। इस स्थिति में व्यक्ति कोई भी गलत कदम उठा सकता है। इसलिए सोचने का ढंग ठीक बनाएं। दूसरों के साथ तुलना अवश्य करें, परंतु ऊपर बताई पहले उदाहरण वाली तुलना करें,  जिससे आपको प्रेरणा मिले। आप भी आगे बढ़ें, तथा दूसरे की हानि भी न करें। 
      विद्यार्थियों के इस उदाहरण से सभी नागरिक लोग भी समझ लेंगे, कि आप को किस प्रकार से सोचना तथा दूसरों के साथ तुलना करनी चाहिए। व्यापार नौकरी सम्पत्ति आदि क्षेत्रों में अच्छे प्रकार वाली तुलना करें, और सकारात्मक चिंतन के साथ जीवन में आगे बढ़ें। यदि आप गलत तरीके से तुलना करेंगे और दूसरों की हानि करेंगे, तो इसका भयानक दंड आपको भोगना पड़ेगा।
       जैसे केला सेब संतरा तरबूज आम इत्यादि अनेक फल होते हैं। सब में अपने अपने विशेष गुण हैं। सभी फल सभी गुणों में एक समान नहीं होते, न हो सकते। ऐसा ही आप भी सोचें, कि सब मनुष्यों में भी अपने-अपने अलग-अलग प्रकार के उत्तम गुण होते हैं। सभी मनुष्य सभी क्षेत्रों में समतुल्य नहीं हो सकते।
      तो इस चिंतन के आधार पर अपने विशिष्ट गुणों को पहचानें, उनका स्वयं भी लाभ उठाएं और दूसरों को भी लाभ पहुंचाएं। एक दूसरे को देखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा लेवें, द्वेष न करें। यही सुख से जीने का उत्तम प्रकार है।
 - स्वामी विवेकानंद परिव्राजक









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