वैदिक विचार


   


                                                                         


 


 


 


 


आपको किसी एक व्यक्ति से शिकायत है या सभी से
        संसार में ऐसा देखा जाता है कि कुछ  लोगों को अपने पड़ोस पड़ोस में ऑफिस में परिवार में रिश्तेदारों में किसी एक आध व्यक्ति से कुछ परेशानी होती है। परंतु कभी-कभी कुछ लोग ऐसे भी देखने को मिलते हैं, जिनको सभी से परेशानी होती है।  सभी के साथ उनकी लड़ाई होती रहती है। 
50 में से शायद ही कोई दो चार व्यक्ति ऐसे होंगे, जिनके साथ उनके विचार मिलते हों। बाकी तो सभी के साथ उनका झगड़ा होता है। तो ये दोनों ही स्थितियाँ देखने को मिलती हैं। 
आपके जीवन में भी ऐसी घटना हो सकती है। यदि आपके जीवन में पहली घटना हो अर्थात आपको किसी एकाध व्यक्ति से ही शिकायत हो या परेशानी हो, तो उससे बात करें। जो भी उसका दोष हो उसे प्रेम से समझाएं। यदि वह भी अच्छा संस्कारी होगा, तो आपकी बात पर ध्यान देगा। हो सकता है, वह ईमानदारी से विचार करे, और अपनी गलती छोड़ भी दे। यदि संस्कारी नहीं होगा,  तो शायद न भी छोड़े। 
परंतु यदि आपको बहुत से लोगों से शिकायत है, अधिकांश लोगों से शिकायत है। 
50 में से कुछ दो-चार व्यक्ति ही आप के अनुकूल हैं, बाकी सभी के साथ आप का झगड़ा होता रहता है। तो ऐसी स्थिति में आप उन सब से बातचीत न करें। तब एकांत में बैठ कर, आंखें बंद करके, स्वयं से बात करें। आत्म निरीक्षण करें । कि आपका सब के साथ झगड़ा क्यों होता है? कहीं आपमें ही तो दोष नहीं है?
 आत्म निरीक्षण करने से यदि पता चल जाए कि दोष तो मेरा ही है। मेरे स्वार्थ अविद्या काम क्रोध आदि दोषों के कारण से ही मेरा दूसरों के साथ झगड़ा होता है। यदि आपको अंदर से ऐसी आवाज आए , तो फिर आप स्वयं अपने आप को सुधारने का प्रयत्न करें। ऐसा करने से दूसरों के साथ आपका झगड़ा कम या समाप्त हो जाएगा। तथा आप, सबके साथ मिलकर, आनंदपूर्वक जीवन जी सकेंगे।
 - स्वामी विवेकानंद परिव्राज


 


 


 




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