सच्चे हितैषी मित्र बनाएं, जो आपत्तिकाल में आपकी सहायता करें.

 



 


 


 


 सच्चे हितैषी मित्र बनाएं, जो आपत्तिकाल में आपकी सहायता करें.
         संसार में दो प्रकार के मित्र देखे जाते  हैं। एक मित्र ऐसे होते हैं, जो हृदय से दूसरों से प्रेम करते हैं। उनकी समस्याओं को अपनी समस्या मानते हैं। जैसे वे अपनी समस्याएं सुलझाने के लिए पूरा परिश्रम करते हैं। ऐसे ही दूसरों की समस्याएं सुलझाने के लिए भी पूरी मेहनत करते हैं। जैसे वे अपने लिए सुख चाहते हैं, ऐसे ही दूसरों के लिए भी सुख चाहते हैं। और ऐसे लोग, समय आने पर,  दूसरों को सुख प्राप्त कराने में पूरी शक्ति लगा देते हैं। ऐसे मित्र ही, सच्चे मित्र कहलाते हैं।
और दूसरे प्रकार के मित्र ऐसे होते हैं, जो स्वार्थी होते हैं। आपत्तिकाल आने पर,  सहयोग देना तो दूर, बल्कि पास भी नहीं फटकते। पूछते भी नहीं। आंखें फेर लेते हैं। ऐसे मित्र नकली और स्वार्थी मित्र होते हैं।


अब जीवन में व्यक्ति अकेला तो जी नहीं सकता। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अल्पशक्तिमान् है। उसे समय समय पर, दूसरों की सहायता लेनी पड़ती है। जब जीवन में कठिनाइयां आती हैं, समस्याएं बढ़ जाती हैं, तब उसे मित्रों का सहयोग  लेना पड़ता है। 
       यदि आपने सच्चे मित्र पहले से बना रखे हैं, तो आपको आपत्ति काल में अधिक कठिनाई नहीं पड़ेगी। ऐसे समय पर वे आपके सच्चे हितैषी मित्र, तन-मन धन से आपका सहयोग करेंगे, और आप की समस्याएं हल कर देंगे। परंतु यदि आपने पहले से ऐसे सच्चे मित्र नहीं बना रखे हैं, तब आपको कठिनाई अधिक आएगी। 
इसलिए जीवन को आनंदपूर्वक जीने के लिए दुखों को शीघ्र दूर करने के लिए, ऐसे सच्चे मित्र पहले से ही बनाकर रखें, जो आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहयोगी होवें। इससे आपका जीवन व्यवस्थित सुंदर तथा शांति से बीतेगा। ऐसी भ्रांतियों में न रहें, कि मुझे किसी की जरूरत नहीं है।
 -  सच्चे हितैषी मित्र बनाएं, जो आपत्तिकाल में आपकी सहायता करें. 



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