क्या घर में दीपक  -- अगरबत्ती जलाने से भगवान प्रशन्न होते है 

 



 


 


प्रश्न  :  क्या घर में दीपक  -- अगरबत्ती जलाने से भगवान प्रशन्न होते है 


     💐 उत्तर  :  प्रसन्ता तब होती है जब मन चाही वस्तु प्राप्त होती है, और जब कोई वस्तु चली जाये तो अप्रसन्नता होती है । ईश्वर तो परिपूर्ण है उसके पास किसी वस्तु की कमी नहीं है , ईश्वर सर्वज्ञ है, पूर्ण ज्ञानी है, अतः उसके सुखी अथवा दुखी होने का प्रश्न ही नही उठता।  ईश्वर सदा एकरस रहता है, उसमें किसी बात की बढ़ोतरी या घटोतरी नही होती ।


   जो परम पिता परमात्मा सूर्य- चन्द्रमा इत्यादि ग्रहों को प्रकाशित करता है, उसे हम कुछ दीपक जलाकर क्या प्रशन्न कर सकते हैं, घर में रोशनी नहीं है तो दिया -- दीपक जलाने से प्रकाश मिल सकता है, प्रन्तु ईश्वर को प्रशन्न करने के लिए दीया जलाना बिलकुल अज्ञानता की बात है ।


    धूप -- अगरबत्ती से थोड़ा धुआं उठता है तथा खुशबू फैल जाती हैं जिससे मच्छर इत्यादि जीव भाग जाते हैं ।ईश्वर को सुगंध की क्या आवश्यकता है? दीया, अगरबत्ती व धूपबत्ती इत्यादि जो हम पूजा में जलाते हैं, वे सब यज्ञकर्म न करने के बहाने है ।सामग्री में सुगन्धित वस्तुओं का मिश्रण इस लिए होता है जिससे अग्नि में आहुति देने पर वायुमंडल में सुगंध फैले और जड़ी-बूटियों-  से कीट - कीटाणुओं का सफाया हो ।इससे घर में पवित्रता का वातावरण उत्पन्न हो जाता है । गाय के घी के परमाणु रोगों को घर में आने से रोकते हैं ।


    आजकल यज्ञकर्म को सभी पवित्र और लाभकारी तो मानते हैं, परन्तु  कर्मकाण्ड करने को किसी के पास समय नही है। दीपक - धूप -अगरबत्ती यज्ञ का ही बिगड़ा हुआ रूप है।  प्रायः स्त्रियाँ घरों में संध्या होते ही दीपक जलाती है, धूप  - अगरबत्तिया जलाती है। कुछ न करने से यह भी अच्छा ही है,  परन्तु दीपक  गाय के घी से जलाना ही लाभकारी है।  धूप-अगरबत्ती भी शुद्ध होनी चाहिए ,इनमें भी मिलावट हो रही है जो भयंकर जान लेवा बिमारियों को जन्म देती है। एक शोद्ध से यह बात निकलकर सामने आई कि अगरबत्तिया भी घटिया स्तर और मिलावट से बनी होने के कारण यह अस्थमा और कैन्सर जैसी बिमारियों को  जन्म दे रही है।


   दीपक, धूप अगरबत्ती से यज्ञ का कोई विरोध नहीं है।इनको जलाना लाभकारी है  परन्तु धार्मिक होना नही है,  यह शुद्ध  होनी चाहिए। इस बात को अपने मस्तिष्क से निकाल दो कि दीया जलाने से ईश्वर प्रशन्न होते है । 
    
      दीया प्रकाश देता है। प्रकाश का आध्यात्मिक अर्थ है ज्ञान, अतः दीया हमें ज्ञान का दीपक जलाने की प्ररेणा देता है।  अत: ज्ञान से ही अज्ञानरूपी अंधेरा भाग जाता है । अगरबत्ती सुगंध देती हैं। हमें प्रेम और श्रद्धा की सुगंध से समाज को सुगंधित करना है ।













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