कोई व्यक्ति आपको सदा पसंद करे, यह बहुत ही कठिन है।

 



 


 


 


 कोई व्यक्ति आपको सदा पसंद करे, यह बहुत ही कठिन है।


       संसार में लोग आपस में मिलते हैं, बैठते हैं, बातचीत करते हैं, विचारों का आदान प्रदान करते हैं। कुछ लोगों के विचार आपस में मिलते हैं। कुछ लोगों के विचार नहीं मिलते  हैं। कुछ लोगों के विचार कभी मिलते हैं, कभी नहीं मिलते हैं। जब लोगों के विचार आपस में मेल खाते हैं, तो वे एक दूसरे को पसंद करते हैं।  आपस में उनके संबंध बढ़ते हैं।
      परंतु जिन लोगों के विचार नहीं मिलते हैं, वे एक दूसरे को पसंद नहीं करते। उनके साथ उन के संबंध कमजोर पड़ जाते हैं या टूट जाते हैं। 
         लोग चाहते हैं कि जो मेरा साथी है वह मुझे सदा पसंद करे। परंतु ऐसा होना बहुत कठिन है। उसका कारण यह है कि संसार में किन्हीं भी दो व्यक्तियों के विचार 100%  एक समान नहीं हो सकते। कभी कभी बहुत से विचार मिल भी जाएं, तो सदा वे नहीं मिले रहते। फिर कुछ समय बाद कुछ न कुछ अंतर आ ही जाता है।
        कारण यह है कि सब के पूर्व जन्मों के संस्कार अलग अलग होते हैं। वे पूर्व संस्कार इस जन्म में उनके साथ चले आते हैं। इसलिए संस्कारों की भिन्नता, सब के माता-पिता अलग, खानपान अलग, उनका धार्मिक विचार अलग, शिक्षा की पुस्तकें अलग, अध्यापक अलग, शिक्षा पद्धति अलग इत्यादि कारणों से उनके विचारों में भिन्नता होना स्वाभाविक ही है। 
        तो जब जब विचारों में टकराव होता है, तब-तब लोग एक दूसरे को पसंद नहीं करते। उनसे दूरियां बन जाती हैं। इस कारण से लोग एक दूसरे को सदा पसंद नहीं करते। 
        इतना सब होने पर भी यदि कोई व्यक्ति इतना बुद्धिमान, विचार मिलाने में कुशल हो, तो वह अधिक से अधिक इतना ही कर पाएगा कि बहुत से लोग उसे पसंद करें, और कुछ लंबे समय तक सब पसंद करें। 
         सदा तो कोई किसी को पसंद नहीं करेगा। इस मानसिकता के साथ ही आप भी अपना जीवन जीएँ। तो आपका जीवन सरल होगा। आपकी दूसरों से आशाएं कम होंगी। और आप अधिक से अधिक सुखी जीवन जी पाएंगे।
 - स्वामी विवेकानंद परिव्राजक








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