जीवन में विश्राम भी आवश्यक है और लक्ष्य प्राप्ति के लिए श्रम भी। दोनों में स्वामी विवेकानंद परिव्राजक

 


 



 


 जीवन में विश्राम भी आवश्यक है और लक्ष्य प्राप्ति के लिए श्रम भी। दोनों में स्वामी विवेकानंद परिव्राजक
        कुछ लोग आलसी प्रमादी होते हैं। वे  कुछ भी काम नहीं करते। व्यर्थ इधर-उधर घूमते रहते हैं। न पढ़ते लिखते हैं, न कुछ धन कमाते हैं। न परिवार के लिए, न समाज के लिए, न देश के लिए, किसी के लिए भी, कुछ काम नहीं करते। बस खाया पिया, इधर उधर घूमे, गप्प मारी और सो गए। ऐसे लोग जीवन में असफल कहलाते हैं। क्योंकि ये लोग आराम तो खूब करते हैं, परंतु काम कुछ नहीं करते।
       कुछ दूसरे लोग ऐसे होते हैं, जो बहुत अधिक श्रम करते हैं। इनमें भी दो प्रकार के व्यक्ति हैं। एक तो मजबूरी में अधिक काम करते हैं, क्योंकि उनके पास सहयोगी कम होते हैं। दूसरे लोग स्वेच्छा से, परोपकार की भावना से, काम करने के शौकीन होते हैं। वे लोग अपनी इच्छा से और श्रद्धा भावना से खूब काम करते हैं। उनकी परोपकार करने में बहुत रुचि होती है। परंतु वे भी अनेक  क्षेत्रों में काम करने में अति कर जाते हैं। 
इस प्रकार से अधिक काम करने वाले, ये दोनों प्रकार के व्यक्ति, आगे चलकर रोगी हो जाते हैं। रोगी होने पर इन्हें दुख भोगना पड़ता है। इस प्रकार से अधिक श्रम करने वाले, ये दोनों प्रकार के लोग भी, जीवन में आंशिक रूप से असफल हो जाते हैं। क्योंकि ये लोग काम अधिक करते हैं, और विश्राम पूरा नहीं करते।
       अब समझने की बात यह है कि, दुख से सभी लोग बचना चाहते हैं और बचना चाहिए भी, क्योंकि यह बुद्धिमत्ता है। और शांति आनन्द की प्राप्ति करना भी आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना भी जीवन की सफलता नहीं होती। इसलिये दुख से बचना और शांति आनंद से जीना ही बुद्धिमत्ता एवं जीवन की सफलता है।
        तो दुखों से बचने के लिए, तथा शांति आनंद से जीने के लिए आपको श्रम और विश्राम का संतुलन करना होगा। 
      जो लोग अपने जीवन में इन दोनों का संतुलन करके चलते हैं, अर्थात उचित मात्रा में श्रम भी करते हैं और उचित विश्राम भी करते हैं, वे स्वस्थ आनंदित और दीर्घायु होते हैं। ऐसे ही लोग जीवन में सफल माने जाते हैं। वे स्वयं भी सुखी रहते हैं तथा समाज राष्ट्र के लिए भी सुखदायक होते हैं।
          आप लोग भी अपना अपना निरीक्षण करें।  श्रम एवं विश्राम में संतुलन बनाएँ। इससे आपका जीवन भी सुखी आनंदित परोपकारी एवं सफल हो जाएगा।
  - स्वामी विवेकानंद परिव्राजक













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