ज्ञानमयी अमृतवाणी 

 



 


 


 


 ज्ञानमयी अमृतवाणी 


     🌷अच्छे शानदार वस्त्र पहनने वाला सभा को मोहित कर लेता है, अच्छी तेज सवारी वाला रास्ते की दूरी को कुछ नहीं समझता, अच्छे स्वभाव और मधुर भाषी सबको वश में कर लेता है।  कभी किसी को निर्बल न समझो, विरोधी से भी प्रेम और मधुरता से व्यवहार करो , बलवान से बैर मत करो और अवसर देख कर काम निकाल लो याने मौक़ा मत चूको, बस इसी को चतुराई कहते हैं ।


    जो सफलता और सम्पदा पाकर इतराने नहीं, जो संकट और विपत्ति में घबराते नही , जो किसी की मजबूरी से फायदा उठाते नही , जो दुसरे के दुख को अपना दुख जैसा ही समझते है , जो परोपकार के लिये सदैव तत्पर रहते है और सेवा करके भी धन्यवाद देते है, जो धैर्य और विवेक कभी नहीं छोड़ते ऐसे जीवात्माओं का मनुष्य योनि में  जन्म लेना सफल हो जाता है।


     नदी पार करके मनुष्य नाव छोड़ देता है, यात्रा पूरी होने पर यात्री सवारी छोड़ देता है, विद्या पूरी होने पर शिष्य गुरू को छोड़ देता है, भोजन करके अभ्यागत घर छोड़ देता है, मतलब निकल जाने पर स्वार्थी व्यक्ति उपकारी को छोड़ देता है, रोग से मुक्त होकर रोगी चिकित्सक को छोड़ देता है और मृत्यु आने पर जीव यह शरीर ही छोड़ देता है। 


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