दूसरों को सुख देवें, और आप भी प्रसन्न होवें।

 



 


 


  दूसरों को सुख देवें, और आप भी प्रसन्न होवें।
           प्रत्येक व्यक्ति सदा प्रसन्न रहना चाहता है। परंतु चाहते हुए भी वह सदा प्रसन्न नहीं रह पाता। इसका कारण वह  जानता नहीं । कारण न जानने की वजह से वह सदा प्रसन्न नहीं रह पाता। यदि कारण का पता चल जाए, तो वह उस बाधक कारण को दूर कर के सदा प्रसन्न रह सकता है। 
         तो वेदो में बताया है कि यदि आप दूसरों को हंसता हुआ देखें, तो उसका प्रभाव आपके ऊपर भी पड़ेगा। उसको देखकर आप भी हँसेंगे। यदि कोई व्यक्ति रो रहा हो दुखी हो परेशान हो क्रोधित हो, तो उसे देख कर उसका प्रभाव आपके ऊपर पड़ेगा। आप भी उस जैसे हो जाएंगे, अर्थात् दुखी परेशान या क्रोधित हो जाएंगे।  इस प्रकार से यह पता चलता है कि दूसरों की स्थिति का प्रभाव हम पर पड़ता है। 
         अब मूल विषय पर आते हैं। उक्त नियम के अनुसार, यदि हम प्रसन्न रहना चाहते हैं, तो हमें दूसरों को प्रसन्न देखना होगा। तब उसका प्रभाव हम पर पड़ेगा। अब दूसरों को प्रसन्न देखने के लिए क्या करना होगा? दूसरों को प्रसन्न करना होगा। अब सार यह हुआ, कि यदि हम प्रसन्न रहना चाहते हैं,  तो इसका उपाय है, दूसरों को प्रसन्न करें। ऐसे काम करें, जिससे दूसरे लोग खुश हों। उनका आनंद बढ़े। और यदि हमारे आचरण से व्यवहार से हमारे कार्य से दूसरों का आनंद बढ़ता है, तो उन्हें देखकर हमारा भी आनंद या प्रसन्नता बढ़ेगी। 
        तो आज का संदेश यही है, कि दूसरों को प्रसन्न करें और स्वयं भी प्रसन्न रहें। यदि आप स्वार्थी बनकर केवल अपनी ही प्रसन्नता का ध्यान रखेंगे, तो दूसरे लोग प्रसन्न नहीं हो पाएंगे। और उन्हें देखकर आप स्वयं भी प्रसन्न नहीं रहेंगे। आप बुद्धिमान हैं, स्वयं सोच लीजिए, क्या करना चाहिए!
 - स्वामी विवेकानंद परिव्राजक


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