यह प्राण क्या


 प्राणों के विषय में भी लिखें मन के पश्चात्, यह प्राण क्या



मन को नियंत्रित करने में प्राणों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
प्राण ही हमारे शरीर में ऊर्जा है, तेज है, शक्ति है। प्राण समस्त जीवन का आधार और सार है; यह वह ऊर्जा और तेज है, जो सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है। प्राण उस प्रत्येक वस्तु में प्रवाहित होता है जिसका अस्तित्व है। बिना प्राण के व्यक्ति एक पल भी जीवित नहीं रह सकता।
वस्तुतः प्राण एक है किंतु शरीर में संचालन -कार्य की दृष्टि से दश प्रकार से भिन्न भिन्न स्थानों पर विभाग करके दश नामों से जाना जाता है।
जिनके नाम हैं-मुख्य प्राण--प्राण, अपान,उदान, व्यान,समान, इनके भी उप प्राण- नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त, धनंजय।
 प्राणों को वश में करने प्राणायाम की आवश्यकता पड़ती है। प्राणों के वश में होने पर ही मन नियंत्रित हो सकता है। आप इसको स्वयं अनुभव कर सकते हो।
कैसे
एक गहरी लंबी श्वांस भरिये देखेंगे उस वक्त मन स्वभावानुसार स्थिर हो रुकेगा क्योंकि मन का सीधा सम्बन्ध प्राण से है। जैसे ही प्रश्वास करोगे अर्थात् बाहर छोड़ने के पश्चात ही मन भी स्वभावानुसार पुनः गति व सोचना शुरू करेगा। योगदर्शन के अनुसार स्थिति, गति और प्रकाश मन के गुण होने से।
यूँ तो समस्त चराचर जगत का महा प्राण चेतन परमात्मा है जिसके कारण सर्वत्र प्राण है, जो सभी के भीतर प्रवाहित है किंतु जीवात्माएं ही इस जीवनी शक्ति का लाभ उठा पाती हैं। सभी वृक्ष वनस्पति भी इसलिए ही लाभ ले पारहे हैं क्योंकि उनमें आत्मा है। क्या किसी नदी तालाब को श्वांस लेते देखा है नहीं क्योंकि वह जड़ है। बिन अपनी शक्ति के कोई पदार्थ श्वांस नहीं लेन देन कर सकता। ईश्वर की शक्ति और अपनी शक्ति दोनों की शक्ति का भरपूर लाभ लेना चाहते हो अर्थात् अपनी आयु को बढ़ा मानव जन्म को सार्थक करना चाहते तो प्राणों को वश में कर मन को वश में करो। कम से कम तीन और अधिक से अधिक 21 प्राणायाम अवश्य करें-महर्षि दयानंद
 मन वश में होकर ही उस महान बड़े चैतन्य प्राण को अनुभव कर सकता है और आत्मा के पास यह ताकत है फिर देर किस बात की आओ चलें उस महाप्राण की ओर जिससे जीवन में भोर



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