विद्यार्थियों के गुण-दोष


साभार =धर्म शिक्षा 


लेखक -जगदीश्वरा नन्द सरस्वती 


 


विद्यार्थियों के गुण-दोष



विदुरजी ने विद्यार्थियों के आठ दोष गिनाये हैं


यथा


आलस्यं मदमोहौ च चापलं गोष्ठीरेव च।


स्तब्धता चाभिमानित्वं तथात्यागित्वमेव च।


एते वा अष्ट दोषा:स्युः सदा विद्यार्थिनां मताः॥


पढ़ते-पड़ते रुक जाना, अभिमानी और अत्यागी होनाये आठ दोष विद्यार्थियों में होते हैं। विद्या के अभिलाषियों को इन्हें त्याग देना चाहिए अर्थ-आलस्य शरीर और बुद्धि में जड़ता, मद नशा, मोह किसी वस्तु में फँसावट, चपलता इधर-उधर की व्यर्थ की कथा कहना और सुनना,पढ़ते-पड़ते रुक जाना, अभिमानी और अत्यागी होनाये आठ दोष विद्यार्थियों में होते हैं। विद्या के अभिलाषियों को इन्हें त्याग देना चाहिए


वैदिक साहित्य में विद्या-अध्ययन करनेवाले के लिए विद्यार्थी, ब्रह्मचारी और अन्त:वासी शब्दों का प्रयोग हुआ है। ब्रह्मचारी शब्द अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसमें अनेक अर्थों का समावेश है। ब्रह्म का अर्थ हैपरमात्मा, वेद, ज्ञान और वीर्य । 'चर' का अर्थ हैविचरण, अध्ययन, उपार्जन और रक्षण। इस प्रकार परमात्मा में विचरण करनेवाला, वेद का अध्ययन करनेवाला, ज्ञान का उपार्जन करनेवाला और वीर्य का रक्षण करनेवाला ब्रह्मचारी है। विद्यार्थी का अर्थ हैविद्या को चाहनेवाला। अन्त:वासी का अर्थ है


आचार्य के चरणों में रहकर विद्या का उपार्जन करनेवाला।


- अंग्रेजी में विद्यार्थी के लिए Student शब्द का प्रयोग होता है। इस शब्द में भावों का कोई गाम्भीर्य नहीं है। यह शब्द कोई विशेष सन्देश भी नहीं देता,परन्तु हमने अपने वैदिक ज्ञान को उडेलकर इस शब्द का ऐसा सुन्दर अर्थ किया है, जिसकी इसके बनानेवाले ने कल्पना भी नहीं की होगी


Student शब्द का प्रत्येक अक्षर एक सन्देश दे रहा है। यथा


S=Studious-खूब पढ़नेवाला


T=Truthful-सत्यवादी


U=Unique-अद्वितीय


D=Diligent-उद्योगी,परिश्रमी


 E=Enthusiastic-उत्साही


N=Noble-आर्य-श्रेष्ठजिसमें ये सात गुण हैं, वही वस्तुत: विद्यार्थी है। 


T=Thoughtful-विचारशील।


जिसमें ये सात गुण हैं, वही वस्तुत: विद्यार्थी है। इन धारण इन गुणों को जीवन में धारण करके सच्चे विद्यार्थी बनो।


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