वैदिक विचार

       


 



 


 


 


 


 


 


उचित समय वही है, जब आप सबकी सुविधा देखकर कोई अच्छा काम शुरू करते हैं*
        बहुत से लोग अच्छे कर्म शुरु करने के लिए मुहूर्त ढूंढते रहते हैं। मुहूर्त की प्रतीक्षा करते हैं। आजकल के तथाकथित ज्योतिषियों से पूछते रहते हैं, कि हमें दुकान आरंभ करनी है, गृह प्रवेश करना है, कोई शुभ मुहूर्त बताएं।
        जरा ठंडे दिमाग से सोचिये, कि यदि शुभ कर्मों का कोई मुहूर्त होता हो, तो इसका अर्थ यह होगा कि उस मुहूर्त को छोड़कर बाकी मुहूर्त अशुभ कर्म को करने का है। ऐसा तो किसी शास्त्र में नहीं लिखा, कि अशुभ कर्म करने का भी मुहूर्त होता है। और न ही किसी देश के संविधान में अशुभ कर्म करने की छूट दी गई है, कि आप इस समय पर झूठ बोल सकते हैं, इस समय पर चोरी कर सकते हैं, इस समय पर अपहरण कर सकते हैं. 
         जब अशुभ कर्म करने के लिए 24 घंटे ही निषेध है, किसी भी समय में बुरे काम करने की छूट नहीं है। तो इसका अर्थ यह हुआ, कि अच्छे काम करने का विधान भी 24 घंटे है। फिर मुहूर्त खोजने में क्यों अपना समय शक्ति नष्ट कर रहे हैं? इसलिए शुभ कर्मों को करने के लिए कोई मुहूर्त ढूँढना बुद्धिमत्ता नहीं है।


दूसरी बात - अपनी रक्षा करना शुभ कर्म है या अशुभ कर्म है? आप कहेंगे, शुभ कर्म है। यदि कोई व्यक्ति आप पर आक्रमण कर दे, तो उस समय आप अपनी रक्षा तत्काल करेंगे या उसके लिए भी कोई मुहूर्त ढूंढेंगे? आप अपनी रक्षा तत्काल करेंगे। जबकि रक्षा करना शुभ कर्म है। इसके लिए आपने कोई मुहूर्त नहीं ढूंढा! 
इस प्रत्यक्ष उदाहरण से भी पता चलता है कि शुभ कर्मों को करने के लिए कोई विशेष मुहूर्त नहीं होता। वास्तव में, शुभ कर्म का मुहूर्त तो 24 घंटे ही होता है। बस इतनी बात ध्यान रखने की होती है, कि जब आप कोई अच्छा काम शुरु करते हैं, तो उस समय कुछ और लोगों को भी उसमें सम्मलित करते हैं। तब उस शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले, उन अन्य लोगों की भी सुविधा देख लेनी चाहिए। उदाहरण के लिए, आपको नये मकान में प्रवेश करना है। उस कार्यक्रम में अपने मित्रों रिश्तेदारों परिचितों आदि को भी सम्मिलित करना है। तो जिस दिन, जितने बजे उन सब की सुविधा भी हो और आपकी भी हो, उस दिन, उतने बजे आप गृह प्रवेश का कार्यक्रम रख सकते हैं। बस इतना ही देखना है। सुबह 10:00/11:00 बजे सबको सुविधा है। फिर 12:00/1:00 बजे तक वह कार्यक्रम पूरा हो जाएगा। फिर सबको भोजन करने का भी वह समय अनुकूल है। तो यही समय इस कार्य के लिए अच्छा है।
बाकी ऐसा कुछ नहीं है कि सुबह 6:00 बजे ही शुभ मुहूर्त है। जबकि सुबह 6:00 बजे न तो आपको इस कार्यक्रम के लिए सुविधा होगी, और न ही दूसरों को। 
इस एक उदाहरण से ही आप लोग बाकी सब बातें समझ लेंगे। बुद्धिमान को संकेत ही पर्याप्त होता है।


 


 


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