पण्डित गुरुदत्त

 


 



 


 


पण्डित गुरुदत्त को योग में काफी रूचि थी। किसी योगी महात्मा के मुलतान आने का पता चला तो अपने चाचा के साथ महात्मा जी की सेवा में पहुँच गये और निम्नलिखित वार्तालाप हुआ उनसे ----


गुरुदत्त - महाराज ! योग सीखने का सर्वोत्तम विधि कौनसी है ? जो महर्षि पतंजलि ने अपनें योग सूत्रों में वर्णन की है , वह या और कोई ?


साधु - पतंजलि की विधि ही ठीक है , अन्य विधियाँ कपोल-कल्पित हैं।


गुरुदत्त - क्या आप स्वामी दयानन्द के विषय में कुछ जानते हैं ?


साधु - हाँ , हम जंगलों में इकट्ठे रहे हैं। एक बार हम एक स्थान पर भागवत पुराण बांचने वाले एक पण्डित के पास कथा सुनने जाते रहे। स्वामी दयानंद जी पुराणों की बातें सुनकर दुखी हो जाया करते थे।


गुरुदत्त --क्या वेद समस्त विद्याओं का भण्डार है ?


साधु - हाँ


गुरुदत्त -क्या सैन्य संचालन और व्यूह रचना के नियम भी वेदों में हैं।


साधु - हाँ , हैं। ये सिद्धांत मैं स्वयं भी जानता हूँ यदि कोई छह मनुष्य मेरे साथ वन में चले तो मैं उन्हें महाभारत तथा रामायण के समय की शैली पर शिक्षा दे सकता हूँ।


गुरुदत्त ने महात्मा जी से बुद्धि तीव्र बनाने का ढंग पूछा। इस पर साधु ने उसे एक नुस्खा लिखा दिया जिसमें बहुत सी औषधियाँ वे ही थी जो संस्कार्विधि में लिखी थी।


 डॉ राम प्रकाश द्वारा लिखी पुस्तक -"पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी


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