क्या हनुमान बंदर थे

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आचार्य भानुप्रताप वेदालंकार
आर्यसमाज संचार नगर इन्दौर मध्यप्रदेश
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https://youtu.be/wRbxrGDOhZc


       


 


साभार -शुद्ध  हनुमच्चरित 


लेखक -आचार्य प्रेम भिक्षुः 


                                                                   



 


 


 


वीर-व्रती हनुमान्, बाली, सुग्रीव और अंगद आदि मनुष्य थे, बन्दर इस विषय में प्रथम वाल्मीकि रामायण के प्रमाण देखें


(१) हनुमान की बातचीत सुन राम, लक्ष्मण को कहते हैं कि यह ऋग्वेद, यजुर्वेद और साम को अच्छी तरह जानता है तथा इसने अनेक बार व्याकरण पढ़ा है-किष्कि० सर्ग ३।२८


(२) राम-सुग्रीव की मैत्री के समय हनुमान् ने याज्ञिक ब्राह्मणों अरणियों से अग्नि को निकाल कर हवन कुण्ड में स्थापन किया-किष्किन्धा १४


 


(३) हनुमान् माता अञ्जना और पिता केसरी बन्दर न थे धार्मिक पुरुष थे, और मनुष्य की संतान पशु, पक्षी कभी नहीं हो सकतीदेखो वा० रा० कि० सर्ग ६६८


(४) वर्षा काल बीतने पर राज्य पर बैठे सुग्रीव को सीता की तलाश करने के लिए महामन्त्री के नाते जो उपदेश हनुमान ने दिया क्या उसे काइ वेदवित् विद्वान् के बिना कर सकता है ? देखो कि० २८/८-२७


(५) सीता की सुध के लिए जब हनुमान लंका की अशोक वाटिका । पहिले सीता ने उसे रावण समझ कर बातचीत में संकोच किया पर पीछे जब हनुमान ने विश्वास दिलाया कि मैं राम का संदेश लेकर जा हूँ, तथा राक्षसों के डर से रात को लंका में दाखिल हुआ हूँ, तब र प्रसन्नता प्रगट की। देखो सु० कां सर्ग ३५।


हनुमान बन्दर न का भ्रम न होता। दूसरे हनुमान लंका, पशु-पक्षियों की भाँति सरे हनमान लंका में रात को न आते बल्कि दिन को अन्य पशु-पक्षियों की भाँति आते। फिर राज्य के गुप्तचर भी विदेशी पुरुषों की देख किया करते हैं, न कि पशु-पक्षियों की


(६ ) हनुमान सीता को संस्कृत भाषा में राम का यशोगान सुनाते हैं, क्या यह बन्दर द्वारा सम्भव है ?


(७) श्रीराम हनुमान् के प्रति कृतज्ञता प्रकट करके उन्हें (युद्ध ११७) में पुरुषोत्तम' कहते हैं। क्या बन्दर के लिये यह प्रयोग सम्भव है?


(८) बाली की राम से बातचीत, सुग्रीव को सन्देश, अंगद को उपदेश तथा मानुषी धर्म शास्त्रानुसार छोटे भाई की स्त्री से बलात् अकाल में सम्बन्ध करने के अपराध में वध रूप दण्ड, श्री राम के हाथ से मिलने और अन्त को द्विजों की भाँति वे-रीति अनुसार संस्कार करने वा कराने से प्रतीत होता है कि वह बन्दर न था।


(९ ) उत्तर काण्ड में भी लिखा है कि जब रावण युद्ध के लिए आया ता बाली समुद्रतट पर सन्ध्या कर रहा था। देखो (उत्तर काँ० सर्ग ३४) स्पष्ट है कि वह न केवल साधारण पुरुष था किन्तु वैदिक धर्मी उच्च वर्ण का राजा था हमारे विचार में तो वह सूर्य वंश की किसी बिछुड़ी हुई शाखा था, क्योंकि उसके पिता का नाम अंशुमान और वृद्धों का नाम सूर्य वंशी लिखा है देखो वा० रा० कि० कां० सर्ग ४।१६


(१०) सुग्रीव को जो बाली का भाई था 'भास्करात्मज' सूर्यपुत्रो महावीर्यः के विशेषण से स्मरण किया है।


(११) बाली के मरने पर उसकी स्त्री ने उसे 'आर्य' कह कर विला किया है*-देखो कि० २०१३


(१२) जो लोग सुग्रीव को बन्दर मानते हैं वे तनिक विचार कर वाल्मीकीय रामायण पढ़कर बतादें कि-क्या कभी बन्दरों के भी कभी वेदवेत्ता ब्राह्मण मन्त्री होते हैं ? -कि० ३।२६-३५


(१३) क्या बन्दरों की शरण में भी कभी रामचन्द्र जैसे विद्वान वा योद्धा जाया करते हैं ? कि० ४/१८-१६


(१४) क्या कभी बन्दर भी अग्निहोत्र कर वेद मन्त्रों से मैत्री दृढ़ किया करते हैं ? कि० ५।१४–१६


(१५) क्या कभी बन्दरों में भी शास्त्र विहित पाप-पुण्य की मर्यादा देखी है ? कि० सर्ग १८।४।४१।।


(१६) क्या कभी बन्दरों का राजतिलक, रत्न, धूप, दीप वा औषधों के जल से स्नान और हवन यज्ञ से होता है वा उनमें राज्याधिकार की पद्धति ऐसी ही होती है जैसी कि सुग्रीव के वंश में थी ? कि० २६ ।२४


(१७) क्या किसी बन्दर को 'आर्य' भी कहा जाता है ? कि० ५५७


(१८) क्या बन्दरों में कभी तारा * रूमा, अञ्जना जैसी पतिव्रता और शास्त्र जानने वाली स्त्रियाँ देखी हैं ? देखो कि० कि० सर्ग ३५।३५


* समीक्ष्य व्यथिता भूमौ सभ्रान्ता नियपातह।


सुप्त्येव पुनरुत्थाय आर्य पुत्रेति शोचती।।


सुषेण दुहिता चेद मर्थ सूक्ष्म विनिर्णये।'


औत्पाति के च विविध सर्वतः परिनिष्ठिता।। कि० २२१३


कि क्या बन्दरों की पत्नी बन्दरी की जगह नारियाँ हो सकती हैं


(२०) क्या कभी किसी बन्दर को विद्वानों वा राजाओं की सभामें बलाया गया था ? उत्तर कां० सर्ग ४०।


_ (२१) इसी प्रकर अंगद द्वारा अपने पिता महाराज बाली के अन्त्येष्टि संस्कार के पश्चात् नवीन यज्ञोपवीत धारण 'ततोऽविन् विधिवत्वा सोऽप सव्यं चकारह' (कि० २५१५०) पढ़कर और महावीर हनुमान् के लिए 'काँधे पूँज जनेऊ छाजै' (हनुमान चालीसा) की रट लगाकर भी आप इस आर्य-रत्न को बन्दर कहने का दुस्साहस करेंगे 


साभार -शुद्ध  हनुमच्चरित 


लेखक -आचार्य प्रेम भिक्षुः 


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