इस भौतिक जीवन में 


       



 


 


 


 


 


 इस भौतिक जीवन में 
         यह निश्चित ही नही कि 
   जीवन के सारे अनुभव या सबक 
    केवल पुस्तकों से ही सीखें जाये 
 जी हां पुस्तकें ज्ञान को बढ़ाती है पर 
    पुस्तकों को पढ़ने वाले के अंदर
    मै ज्ञानी हूं ये अभिमान न आये 
                 क्योंकि 
    अच्छी पुस्तकें हमारे अंदर जो 
अज्ञानरूपी अंधकार है ये दूर करती है  
  सत्यज्ञान से प्रकाशित कर देती है 
                 साथ ही 
जीवन के कुछ अनुभव हमारे अपने 
  आपसी सम्बंध ज्ञान सीखा देते है 
साथ ही अपने सम्बंध बनाये रखे 
        किसी को धोखा न दें 
               इसलिए 
जीवन में जहाँ से भी आगे बढ़ने का मार्ग प्राप्त हो उसे आप छोड़े न उसे शीघ्र ही ग्रहण कर लें चाहे वह ज्ञान अपने से छोटे बड़ों ज्ञानी अज्ञानी या अन्य प्राणी से क्यों न हो उसमें देर न करें साथ ही पतन के मार्ग को विना देर किये उसे छोड़ दें जीवन में आनंद की प्राप्ती होगी 


 


 




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