एक पादरी,

 



 


 


 


एक बार, 
एक पादरी, 
एक गाँव में पहली बार पहुँचा 
छोटे से बस-स्टेशन उतर कर  आस-पास देखा और पास में खेल रहे बच्चों से गाँव के चर्च का रास्ता पूँछा 


बच्चों ने सहजता से बता दिया और खेलने में लग गए 
लेकिन
 पादरी ने बच्चों को जाते-जाते कहा की आज चर्च आना
 
बच्चों ने तपाक से पूछ लिया .....क्यों ?


पादरी बोला :- आज तुमको हम स्वर्ग का रास्ता बतायेंगे ....ठीक है 


बच्चों में जो बड़ा था वह फट बोला :- ये देखो !!!....जिसको चर्च का रास्ता पता नहीं ....हमसे पूछता है ...वह अब हमें स्वर्ग का रास्ता बतायेगा .....

कृपया एक बार 
मन-से-या बेमन से 
श्रद्धा से या अश्रद्धा से 
सत्यार्थ-प्रकाश जरुर पढ़ें 
आपके बच्चे स्वर्ग के चक्कर में नहीं आयेंगे क्योंकि ऊपर कथा में जो सबसे बड़ा बालक था वह आर्यसमाज नित्य जाया करता व सत्यार्थप्रकाश भी पढ़ता/पढ़ाता था ।


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