चर्च चुप क्यों है 

 



 


 


 


 


चर्च चुप क्यों है 


 


 


 


भारत विभाजन के समय बड़ी संख्या मे दलित हिंदूओ को पाकिस्तान मे ही रोक लिया गया। उनको भारत ना आने देने के 2 कारण थे। 1 भारत मे रह गए मुस्लिमों की सुरक्षा गारंटी 2 नाले शिवेज की सफाई करवाना व सिर पर मैला ढोना आदि। इन्हे मुस्लिम नहीं बनाया गया क्योंकि सफाई करना नापाक काम है और मुस्लिमो से सफाई कर्मचारी जैसा नापाक कार्य नहीं लिया जा सकता। भारत की नेहरू सरकार ने भी उनकी कोई सुध नहीं ली और ये इस्लामिक रिपब्लिक पाकिस्तान की चक्की मे पिसते रहे। 


लगभग 1960 से शुरू हुआ इन दलित हिंदुओं का कैथोलिक ईसाईकरण। कैथोलिक ईसाई बनने से उनकी ज़िंदगी मे छोटा सा बदलाव आया। ईसाई को गुलाम या बंधुआ मजदूर नहीं रखा जा सकता था क्योंकि पाकिस्तान कई ईसाई देशों से मदद लेता था। गुलाम या बंधुआ मजदूर केवल हिन्दू दलित ही होते थे। परन्तु पाकिस्तान मे जब ईसाई बनाने का काम धीमा हुआ तो विदेशी फंडिग भी बंद हो गई। अरब और पाकिस्तान तो छोड़िए भारत के कश्मीर मे भी किसी मुस्लिम को ईसाई बनाना असम्भव है। 
लगभग 10 साल पहले चीन के साथ पाकिस्तान के संबंध बढ़े और चीन ने पाकिस्तान मे  CPEC  बनाना शुरू किया। पिछले 5 साल से चीनी हजारों पाकिस्तानी लड़कियों को ले जा रहे हैं। इसमे अधिकतर उन ईसाई परिवारों की लड़कियां हैं जो आजादी के समय दलित हिन्दू थे। 


सरकारी स्तर पर चीन में हो रही शादियों के बारे में बात करने पर पाबंदी है। 
इन शादियों की ख़बर मीडिया में आने के बाद, पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी (FIA) ने इस बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट जून 2019 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भेजी थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, 629 पाकिस्तानी लड़कियों को तस्करी कर के चीन ले जाया गया है.
इस मामले में पंजाब के अलग-अलग शहरों से क़रीब 50 चीनी नागरिकों और उनके साथ काम करने वाले बिचौलियों को गिरफ़्तार किया गया था. केवल एक पर अभी मुक़दमा चल रहा है. बाक़ी सभी लोगों को अदालत ने बरी कर दिया है.
अगस्त 2019 में संयुक्त राष्ट्र के एक सेमिनार में शिरकत करने वालों, जिनमें एफ़आईए के भी कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, के अनुसार 2018 के बाद से क़रीब 20 हज़ार पाकिस्तानी महिलाओं को तस्करी करके ले जाया गया था.


चीन के बहुत से पुरुष, पाकिस्तान की ग़रीब ईसाई लड़कियों को चुन-चुन कर निशाना बना रहे हैं. उन्हें अमीर घरों में शादी का झांसा दिया जाता है. इस काम में बहुत से अनुवादक और पादरी, चीनी मर्दों की मदद कर रहे थे. ग़रीब ईसाई लड़कियों को शादी के बहाने चीन ले जाया जाता था. फिर उन्हें वेश्यावृत्ति के कारोबार में धकेल दिया जाता था।


पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी की तफ़्तीश में पता ये चला था कि कई मामलों में तो पाकिस्तान की इन ग़रीब ईसाई लड़कियों के अंग निकाल कर अंगों के अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में बेच दिया गया था. एफ़आईए की जाँच में पता ये चला था कि जिन लड़कियों को वेश्यावृत्ति के 'लायक़' नहीं समझा जाता था, उनके अंग निकाल कर बेच दिए जाते थे.


ये है कम्युनिस्ट चीन और इस्लामिक रिपब्लिक पाकिस्तान की गरीब इसाइयों के प्रति हमदर्दी। चर्च भी इस पर चुप है।



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