भारतीय दर्शन और महर्षि दयानन्द का दृष्टिकोण 

 


 


 


 


 


 


 



 


भारतीय दर्शन साधारण रूप से दो भागों में विभक्त हैं-


 आस्तिक दर्शन
और नास्तिक दर्शन।  


आस्तिक दर्शनों में इन छह दर्शनों की गणना की जाती है- सांख्य, वैशेषिक, योग, न्याय, वेदान्त, मीमांसा।


 नास्तिक दर्शनों में चार्वाक दर्शन, बौद्ध दर्शन तथा जैन दर्शन माने जाते हैं। 


आस्तिक-नास्तिक दर्शनों का भेद वेदों की मान्यता एवं अमान्यता पर आधारित है।
 फलतः सभी आस्तिक दर्शन वेदों को न केवल प्रमाण, अपितु 'स्वतः प्रमाण' स्वीकार करते हैं; जबकि नास्तिक दर्शनों को वेदों का किसी प्रकार का प्रमाण तक भी स्वीकार नहीं।


 इसलिए आस्तिक-नास्तिक दर्शनों के प्रतिपाद्य सिद्धान्तों में अनेकत्र भेद का होना स्वाभाविक है; परन्तु जब आस्तिक दर्शनों में भी परस्पर भेदमूलक मान्यताएं सम्मुख आती हैं, तो यह बड़ा असमंजस-सा प्रतीत होता है।


महर्षि दयानन्द को अपने काल में सर्वसाधारण समाज की तथा समाज में मूर्द्धन्य समझे जाने वाले विशिष्ट अंगों की भी गिरती हुई दशा को सुधार की ओर परिवर्तित करने के लिए सभी तरह के व्यक्तियों के साथ जूझना पड़ा, उसने देखा, कि शास्त्रीय चर्चाओं में विद्वान् समझे जाने वाले व्यक्ति भी बाद आदि कथाओं में दार्शनिक पद्धति की कितनी उच्छृंखलता के साथ अवहेलना करते हैं। दार्शनिक तथ्यों को अपने निराधार मनघड़न्त विचारों के अनुसार तोड़-मरोड़ कर निर्लज्जता से जनता के सम्मुख प्रस्तुत करते हैं। मूल दर्शनों की संस्थापना करने वालों को भी एक दूसरे का विरोधी बताते हैं, क्या साक्षात्कृतधर्मा ऋषि-मुनियों का कथन परस्पर विरुद्ध माना जा सकता है? सत्य सदा एक होता है, सत्य के दो रूप नहीं हो सकते, तब क्या दर्शनों में उन ऋषि-मुनियों ने सत्य का उत्पादन न कर असत्य को प्रस्तुत किया जाए? ऋषि ने दर्शनों की इस दुर्दशा को गहराई के साथ अन्तर्दृष्टि से देखा-परखा और एक सूत्र खोज निकाला, जिसमें सब दर्शन-माला में मोतियों के समान गुंथे हुए हैं।


sarvjatiy parichay samelan,marriage  buero for all hindu cast,love marigge ,intercast marriage  ,arranged marriage 


 rajistertion call-9977987777,9977957777,9977967777or rajisterd free aryavivha.com/aryavivha app


Popular posts from this blog

वैदिक धर्म की विशेषताएं 

ब्रह्मचर्य और दिनचर्या

अंधविश्वास : किसी भी जीव की हत्या करना पाप है, किन्तु मक्खी, मच्छर, कीड़े मकोड़े को मारने में कोई पाप नही होता ।