आचार्य धर्मराज

आज का चिन्तन 


 पूरे दिन दूसरों की कमियों की स्वभाव की चर्चा करते-करते हम अपने समय का तो अपव्यय करते ही हैं इससे हमारी स्वयं की संकल्प शक्ति भी कमजोर हो जाती है। गलत आचरण वाले लोगों की चर्चा करते-करते मन भी यह धारणा निर्मित कर लेता है कि दनिया ख़राब लोगों से भरी पड़ी है वो भी असत मार्ग पर चले।
 अपने जीवन को शुभ उद्देश्यों और शुभ संकल्पों के लिए तैयार करो। जो व्यक्ति सृजनात्मक, रचनात्मक कार्य में लग जाते हैं उन्हें दूसरों की बुराई और दोष देखने का वक़्त ही नहीं मिलता। 
 दुनिया में जितने भी महान व्यक्ति जो वैज्ञानिक, कलाकार, चित्रकार, कवि, साहित्यकार और वैज्ञानिक हुए वो केवल इसीलिए सफल हो पाए क्योंकि वो प्रत्येक पल अपने अनुष्ठान में सतत संलग्न रहे। हम भी संसार को बहुत कुछ दे सकते हैं। क्या दे सकते है अब ये तो हम स्वयं ही जानते हैं।
        आचार्य धर्मराज


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