रंगों का त्योहार होली

रंगों का त्योहार होली


        होली का त्योहार फाल्गुन माह की पूर्णिमा को ओर चैत्र माह की प्रथमा कोें मनाया जाता है। इस समय प्रकृति का सौंदर्य बढ़ जाता है। वन उपवन में विविध रंगों के फूल खिलते हैं। आम के पेड़ों पर कोयल के कुक सुनाई देने लगती है  । शीतल मंद सुगंधित समीर बहती है। लोग खुश होते हैं।उनके उल्लास जा प्रतीक है होली का त्योहार।


         बृज की चौरासी कोस की परिक्रमा में होली को बड़े उत्साह से मनाते हैं। लठमार होली वहां की प्रसिद्ध है। होली का रसिया गाया जाता है। चंग ढप ढोल नगाड़े मंजीरे ढोलक हारमोनियम बजाकर लोग नाचते गाते हैं। अबीर गुलाल से सभी जात धर्म के लोग आपस मे होली के रंगों से रंग बिरंगे नज़र आते हैं। भाईचारे व प्रेम विश्वास का त्योहार है होली।


       होलिका दहन के दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को जलाया जाता है क्योंकि उसने भक्त प्रह्लाद को अपनी गोदी में बैठाकर अग्नि में बैठ गई थी चिता सजाकर। भक्त प्रह्लाद तो बच गया परन्तु होलिका भस्म हो गई। तात्पर्य बुराई रूपी होलिका जल गई और धर्म का प्रतीक अच्छाई का प्रतीक भक्त प्रह्लाद बच गया। अच्छाई की जीत हुई। इसी खुशी में प्रतिवर्ष होलिका दहन किया जाता है जो हमे अपने जीवन मे सद्गुण रखने की सीख देता है। होली के उत्सव के प्रारम्भ होने के पीछे एक कथा है। हिरण्यकश्यप  नाम का एक राजा था। जो भगवान का नाम नहीं लेने देता था। वह बुरे काम करता था।उसने राज्य में घोषणा करवा दी थी कि कोई भी ईश्वर की पूजा आराधना या नाम लेगा तो उसे अपराध माना जायेगा। राजा हिरण्यकश्यप के एक पुत्र था जिसका नाम प्रह्लाद था । वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। वह गुरुकुल में पढ़ता तो विष्णु विष्णु नाम लिखता रहता था।वह दिन रात ईश्वर की आराधना करता रहता था। अपने पिता के कहने पर भी प्रह्लाद ने ईश्वर भक्ति नहीं छोड़ी। उसके पिता ने उसे ऐसा करने से मना कीट। रोकने का बहुत प्रयास किया।राजा ने उसका वध करने के कई उपाय किये लेकिन ईश्वर की इच्छा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गया।


       होलिका राजा की बहन थी। उसने उसे पास बुलाकर कहा होलिका तुम प्रह्लाद को गोद मे लेकर अग्नि में बैठ जाओ। ये बालक जल जाएगा। राजा के आदेश की अक्षरशः पालना करती है होलिका जिसमे वह स्वयं जल जाती है और प्रह्लाद बच जाता है। ये देख लोगो को खुशी मिली। अधर्म पर धर्म की विजय हुई। तब से यह उत्सव मनाया जाता हैं।प्रथम दिन रात को होलिका दहन किया जाता है। स्वादिष्ट मिठाइयों व पकवान बनाये जाते हैं। सभी लोग नाचते गाते गण। खुशी का साम्राज्य छा जाता है  हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में होली भी खास त्योहार माना जाता है।


       होली को धुलेंडी के दिन गुलाल रंगों से खेलते हैं। आजकल बाजार में नकली रंग बिकते है जिनसे होली खेलने पर त्वचा संबंधी रोग हो जाते है। हानिकारक केमिकल से बने रंगों से त्वचा रोग हो जाते हैं। हमे टेसू के प्राकृतिक रंग से खेलना चाहिए। इनसे कोई हानि नहीं है।


         होली के दिन पानी की बचत करना चाहिए। जल की एक एक बूंद कीमती है यह समझने की जरूरत है। होली के दिन रंगों की बौछार के पीछे तर्क दिए जाते है कि हम निराशा से मुक्त हो जीवन मे विविध रंग भरें। नव उल्लास नव ऊर्जा से हम सरोबार होकर देश व समाज सेवा के कामों में आगे आएं।


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