मनुष्य की विचित्रता

मनुष्य की विचित्रता             


- अपवाद स्वरूप कुछ ही लोग ऐसे होते हैं, जो दूसरों के दोषों पर ध्यान नहीं देते। न उनकी कोई टीका टिप्पणी करते हैं। न उन दोषों का कोई प्रचार करते हैं। उन अपवाद स्वरूप कुछ मनुष्यों को छोड़कर, प्रायः सभी लोग दूसरों के दोषों पर ही दृष्टि रखते हैं। अपने दोष तो शायद ही कभी देखते होंगे। दूसरों के दोषों पर ही विचार चिंतन चर्चा प्रचार चलता रहता है। जिसका परिणाम यह होता है, कि कुछ ही समय में वे दोष उन व्यक्तियों के अंदर आ जाते हैं, और वे अत्यंत हानि उठाते हैं। यद्यपि ऐसा करना उचित नहीं है। परंतु इस बात को वे लोग समझते नहीं हैं, इसलिए दूसरों के दोष पर ही चर्चा विचार प्रचार चलता रहता है।
 वैदिक विद्वान ऋषि लोग ऐसा मनोविज्ञान बताते हैं कि आप दूसरे व्यक्ति में जिस चीज को देखेंगे, उस पर विचार करेंगे, वही चीज कुछ ही समय में आपके अंदर आ जाएगी। यदि आप दूसरों के गुणों पर चिंतन विचार करेंगे, तो आपके अंदर वे गुण आ जाएंगे। यदि आप दूसरों के दोषों पर विचार करेंगे, तो कुछ ही समय में वे दोष आपके अंदर आ जाएंगे। 
 मनोविज्ञान के इस रहस्य को न समझने के कारण, लोग दूसरों के दोषों की ही चर्चा करते रहते हैं। तो इस हानि से बचने के लिए उत्तम यही रहेगा, कि दूसरों के दोषों पर ध्यान न दें,  बल्कि उनके गुणों पर ध्यान दें. उनके गुणों पर चर्चा विचार प्रचार करें, तो कुछ ही समय में आप भी वैसे ही गुणवान बन सकते हैं। यही आपके लिए और सबके लिए हितकारी होगा। 
यदि दोष ही देखने हों, तो अपने दोषों को देखें, तथा उन्हें दूर करने का भरसक प्रयत्न करें। इससे आपको बहुत अधिक लाभ होगा। * आपके जितने अधिक दोष दूर होते जाएंगे, उतना ही आपका दुख घटता जाएगा। और जितने गुण आपमें बढ़ते जाएंगे, उतना ही आपका सुख भी बढ़ता जाएगा।* - मनुष्य की विचित्रता - अपवाद स्वरूप कुछ ही लोग ऐसे होते हैं, जो दूसरों के दोषों पर ध्यान नहीं देते। न उनकी कोई टीका टिप्पणी करते हैं। न उन दोषों का कोई प्रचार करते हैं। उन अपवाद स्वरूप कुछ मनुष्यों को छोड़कर, प्रायः सभी लोग दूसरों के दोषों पर ही दृष्टि रखते हैं। अपने दोष तो शायद ही कभी देखते होंगे। दूसरों के दोषों पर ही विचार चिंतन चर्चा प्रचार चलता रहता है। जिसका परिणाम यह होता है, कि कुछ ही समय में वे दोष उन व्यक्तियों के अंदर आ जाते हैं, और वे अत्यंत हानि उठाते हैं। यद्यपि ऐसा करना उचित नहीं है। परंतु इस बात को वे लोग समझते नहीं हैं, इसलिए दूसरों के दोष पर ही चर्चा विचार प्रचार चलता रहता है।
 वैदिक विद्वान ऋषि लोग ऐसा मनोविज्ञान बताते हैं कि आप दूसरे व्यक्ति में जिस चीज को देखेंगे, उस पर विचार करेंगे, वही चीज कुछ ही समय में आपके अंदर आ जाएगी। यदि आप दूसरों के गुणों पर चिंतन विचार करेंगे, तो आपके अंदर वे गुण आ जाएंगे। यदि आप दूसरों के दोषों पर विचार करेंगे, तो कुछ ही समय में वे दोष आपके अंदर आ जाएंगे। 
 मनोविज्ञान के इस रहस्य को न समझने के कारण, लोग दूसरों के दोषों की ही चर्चा करते रहते हैं। तो इस हानि से बचने के लिए उत्तम यही रहेगा, कि दूसरों के दोषों पर ध्यान न दें,  बल्कि उनके गुणों पर ध्यान दें. उनके गुणों पर चर्चा विचार प्रचार करें, तो कुछ ही समय में आप भी वैसे ही गुणवान बन सकते हैं। यही आपके लिए और सबके लिए हितकारी होगा। 
यदि दोष ही देखने हों, तो अपने दोषों को देखें, तथा उन्हें दूर करने का भरसक प्रयत्न करें। इससे आपको बहुत अधिक लाभ होगा। * आपके जितने अधिक दोष दूर होते जाएंगे, उतना ही आपका दुख घटता जाएगा। और जितने गुण आपमें बढ़ते जाएंगे, उतना ही आपका सुख भी बढ़ता जाएगा।


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