क्या विज्ञान पृथ्वी के विनाश का कारण बनेगा

प्रश्न-  क्या विज्ञान पृथ्वी के विनाश का कारण बनेगा ?


उत्तर-  धार्मिको की जनसंख्या में बढ़ोतरी ही सिर्फ इसका कारण बनेगा और बन रहा है ! जबकि विज्ञान में जनसंख्या रोकने के लिए निरोध से लेकर नसबंदी सब कुछ बनाया ! लेकिन धर्मों के मूर्ख ठेकेदारों के तथाकथित अल्लाह, ईश्वर , को जनसंख्या पर रोक रास नहीं आया ! जन संख्या बढ़ाकर भोझ बन गए ! फिर पेट भी फटे ! वायु भी प्रदूषित हुई ! पानी के लाले भी पड़ गए ! कहा भी जाता है कि बंदर के हाथ उस्तरा मिल जाए तो वह कहां कहां उत्पात मचाएगा वो सब जानते हैं ! यही हुआ धार्मिक मजहबीयो के साथ दिन रात नमाज पढ़कर , मंदिर का घंटा बजाकर. प्रेयर करके, मूर्खता प्रदर्शित करने वालों को, विज्ञान केसे उपयोग करना है, समझ नहीं आया ! जिन वैज्ञानिकों की रेशनल सोच के कारण उन्हें यह जिंदा जला देते थे! तडीपार कर देते थे ! उनके बनाए उपकरणों को बंदर के हाथ में उस्तरा जैसा इस्तेमाल करने लगे ! फिर बैलेंस तो बिगड़ना ही था ! साइंस में लाउड स्पीकर बनाया सुविधा के लिए! धर्मीको ने उसे उसे मस्जिदों मंदिरों में टांग कर ! शादी विवाह में , उत्सव में इस्तेमाल कर ध्वनि प्रदूषण की गंद मचा रखी है ! यह सिर्फ एक उदाहरण है ! इन धार्मिक असभ्य लोगों ने विज्ञान की सभ्यता को बर्बाद करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी ! और यह असभ्य लोग दिन रात रोते हैं कि विज्ञान का दुरुपयोग करने में यह धार्मिक असभ्य इतने हद तक गिर गए कि विज्ञान ने सुरक्षा के लिए हथियार बनाया! और इन महा मूर्खों ने उसे जिहाद, मॉब लिंचिंग, दंगा , फसाद , दूसरे देशों को हड़पने में लगा दिया! ऐसे तमाम उदाहरण भरे पड़े हैं ! जहां इन धार्मिक असभ्य प्रजातियों ने विज्ञान का उपयोग ही नहीं बल्कि सिर्फ दुरुपयोग ही किया है ! कहा भी गया है प्रसव पीड़ा का दर्द एक मां ही समझ सकती है! वैसे ही विज्ञान की अनुभूति साइंटिफिक थिंकर ही समझ पाते हैं ! वो क्या समझेंगे जिनके तथाकथित ईश्वर , अल्लाह,  कभी अवतार तो कभी पैगंबर भेजते रहे हैं ! लेकिन हगने के लिए एक शौचालय तक का विज्ञान नहीं बता पाए!   


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