क्या निराकार , दुनिया बना सकता है

प्रश्न- क्या निराकार , दुनिया बना सकता है?


उत्तर- विभिन्न धर्म ,मजहब , में कहां गया है कि . दुनिया बनाई गई और इसको बनाने वाला निराकार है। ब्राह्मण धर्म की कुछ शाखाएं , इस्लाम , सहित बहुत से निराकारी गुरु घंटाल इस तरह की अंधविश्वास ,और अवैज्ञानिक बात प्रचारित कर मानव सभ्यता को सदियों से गुमराह करते रहे ।


      जबकि सच्चाई यह है कि जिसका आकार ही नहीं है वह दूसरों को क्या आकार देगा। जिसकी खुद की बुद्धि नहीं है , वह दूसरों को क्या बुद्धि देगा। चेतन बिना जड़ के अस्तित्व में ही नहीं हो सकता और जब जड़ की बात होती है वो आकार में आता है ! कुछ लोग वायु का उदाहरण दे सकते हैं । कुछ लोग लिक्विड का भी । लेकिन यह दोनों भी एक बाउंड्री में आकार ले लेते हैं तथा ग्रेविटी इंडिपेंडेंट भी नहीं है दूसरी बात कि यह सिर्फ जड़ है इनमें चेतना भी नहीं है , इसलिए यह उदाहरण भी ईश्वर ,अल्लाह से तुल्य नहीं है।


    कितनी हास्यप्रद बात है ईश्वर, अल्लाह के अस्तित्व बताने वाले ने इतनी भयंकर गलती की है, उसे खुद भी देख न सके , और डेटा फाइंड भी ऐसा किए जो बिल्कुल अवैज्ञानिक अतार्किक और मनगढ़ंत है। 


    आकार बताने वाले तो पूर्णता ढकोसले साबित हुए है साथ ही जितने भी लोगों को अब भी कन्फ्यूजन मैं है की ईश्वर ,अल्लाह , गॉड निराकार है वो जवाब देखकर जरूर बताएं कि बिना आकार के चेतन ने दुनिया कैसे बना दी। बिना हाथ पैर , बिना अंग के , क्योंकि बुद्धि होने के लिए भी अंग ( दिमाग ) होना जरूरी है और किसी भी वर्क को करने के लिए फोर्स की जरूरत होती है और इस स्पेशल डिसीजन देने के लिए स्पेशल आकार की हेल्पिंग हैंड की जरूरत होती है फिर निराकार ने आकार कैसे बना दिया। 


Popular posts from this blog

वैदिक धर्म की विशेषताएं 

ब्रह्मचर्य और दिनचर्या

अंधविश्वास : किसी भी जीव की हत्या करना पाप है, किन्तु मक्खी, मच्छर, कीड़े मकोड़े को मारने में कोई पाप नही होता ।