आज का वेदमंत्र,


त्रिवन्धुरेण त्रिवृता रथेन त्रिचक्रेण सुवृता यातमर्वाक्।
पिन्वतं गा जिन्वतमर्वतो नो वर्धयतमश्विना वीरमस्मे॥ ऋग्वेद १-११८-२।।


हे अश्विनों(दिव्य शक्तियों), आप अपने त्रिकोण, तीन बाजू और तीन चक्र वाले रथ पर सवार होकर तीव्र गति से आओ, और हमारी भूमि को समृद्धि दो। हमारे परिवहन के साधनों को उन्नति दो। वीरों को वृद्धि दो और मनुष्य का जीवन सुखमय बनाओ।


 


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