वेद मंत्र

स ग्रामेभिः सनिता स रथेभिर्विदे विश्वाभिः कृष्टिभिर्न्वद्य।
स पौंस्येभिरभिभूरशस्तीर्मरुत्वान्नो भवत्विन्द्र ऊती॥ ऋग्वेद १-१००-१०।।


प्रशासक  राष्ट्र के धन का लाभ दूर ग्राम में किसान को भी देने वाला हो। वह राष्ट्र के धन का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी को देने वाला हो। वह अपनी आत्मा और शरीर की शक्ति और विश्वास से सभी प्रकार की आलोचनाओं पर विजयी हो। ऐसा सुरक्षा और उन्नति देने वाला प्रशासक हमारा हो।


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