वैदिक लेख

डा प्रतिभा जोशी जीव के व्याख्यान पर ध्यान देने से यह बात सामने आती है कि न जाने क्यौं मानव मात्र के कल्याण के लिए दिये गये परमपिता परमात्मा के ज्ञान वेद से उन्हें घृणा है इसका साक्षात प्रमाण एक तो आपके सामने रख चुका हूँ कि आत्मा परमात्मा का अ'ग है और दूसरा उन का गायत्री मन्त्र को शापित कहना जबकि इन दोनों का उनके उस दिन के भाषण के विषय से भी कोई सम्बन्ध नहीं था उन्होनें कहा कि गायत्री मन्त्र को तो छोड ही दे यह तो शापित मन्त्र है इस कारण इस मन्त्र से किसी कोई सुख नहीं मिल सकता उनके क्रम शब्द मिथ्या भ्रामक और गुमराह करने वाले तो हैं ही बल्कि जिस जीवन सौरभ के मच पर बोल रही थीं उस आयोजक की साख को भी हानि की है गायत्री मन्त्र को गुरु मन्त्र भी कहते हैं गुरु अपने शिष्य के लिए कभी शापित नहीं होता गायत्री मन्त्र इतना महान है कि इसे महि मन्त्र भी कहा गया है जिसमें महानता होती है वह सहारा के सुखों को बढाने वाला होता है न कि शापित होता है इस मन्त्र का प्रतिदिन दोनों किल आधा घण्टा ऊची आवाज लगातार जाप करने वाले की कोई नाडी अपराध नहीं होती हर्ट अटैक थाइराइड शुक्र अपच आदि भरकर बीमिरियो से बचा रज्ञता है और यदि पहले से कोई रोग है तो उसके रोग दूर हो जाते हैं एसे मन्त्र को शापित कहना छोटी मानसिकता को ही दिखाता है वास्तव मे वेद का ज्ज्ञानप्रथमं सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा ने जीव मात्र के कल्याण के लिए दिया था परम आत्मा का दिया ज्ञान होने के कारण न तो वेद और न ही गायत्री मन्त्र सहित कोई भी मन्त्र कभी शापित हो सकता है इसलिए भविष्य में डा प्रतिभा जोशी जी को अपनी गल्तियों मैं सुधार करना चाहिये गायत्री मन्त्र की विस्तरित जानकारी केलिए कल तक प्रतिक्षा करें


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