संशय का समाधान

       संशय का अर्थ है जब मन में दो तीन चार पांच इत्यादि अनेक विचार उत्पन्न हो जाएं,  और सत्य क्या है वह समझ में न आ रहा हो, ऐसी स्थिति का नाम संशय है। उदाहरण -  संसार में अन्याय को देखकर व्यक्ति सोचता है कि यहां इतना अत्याचार है, गरीबों पर कमजोर लोगों पर,  रोगियों पर, स्त्रियों पर, निर्दोष व्यक्तियों पर, इतना अन्याय हो रहा है। इसे देखकर उसके मन में संशय उत्पन्न होता है, पता नहीं ईश्वर है भी या नहीं? और यदि है भी, तो वह न्यायकारी है या नहीं? यदि न्यायकारी है भी, तो वह इतना अन्याय क्यों देख रहा है? अन्यायकारियों को दंड क्यों नहीं देता? निर्दोष निरपराध व्यक्तियों की रक्षा क्यों नहीं करता? इत्यादि। इस प्रकार से मन में संशय उत्पन्न होता है। संशय उत्पन्न होना कोई आश्चर्यजनक या असंभव बात नहीं है। बल्कि स्वाभाविक है। क्योंकि जीवात्मा अल्पज्ञ है । अल्पज्ञ में ज्ञान कम होता है। ज्ञान की कमी से उसको संशय उत्पन्न होना स्वाभाविक है।


       यदि संशय उत्पन्न हो जाए, तो चिंता नहीं करनी चाहिए, परंतु उसका समाधान अवश्य ढूंढना चाहिए। यदि संशय उत्पन्न हो जाए और उसका समाधान न मिले अर्थात संशय बना ही रहे, तो स्थिति अच्छी नहीं है। तब यह संशय आपके आत्मविश्वास को, ईश्वरविश्वास को सब को नष्ट कर देगा। इसलिए जितना भी मुख्य विषयों में संशय मन में उत्पन्न हो, उसका समाधान अवश्य ढूंढें। समाधान - *जैसे विद्यार्थी परीक्षा में प्रश्नों का उत्तर लिखने में स्वतंत्र है। वह सही लिखे या गलत लिखे, परीक्षक उसे रोक नहीं सकता। यदि विद्यार्थी गलत उत्तर लिखे, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि परीक्षक अनुपस्थित है, अथवा वह विद्यार्थी को गलत उत्तर लिखने से रोकता क्यों नहीं?* यही तो परीक्षा का नियम है कि वह 3 घंटे तक स्वतंत्र है, जो भी लिखे, उसे रोका नहीं जाएगा। बाद में परीक्षक उसके अंक देगा।


      इसी प्रकार से प्रत्येक आत्मा कर्म करने में स्वतंत्र है। पूरा जीवन उसकी परीक्षा है। जीवन में यदि वह दूसरों पर अन्याय करता है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि ईश्वर रूपी परीक्षक है ही नहीं। अथवा वह न्यायकारी नहीं है , अथवा रोकता क्यों नहीं है! जब तक परीक्षा चलेगी, तब तक ईश्वर किसी व्यक्ति का हाथ पकड़कर उसे नहीं रोकेगा। मन में सूचना अवश्य देता है कि यह काम गलत है इसे न करो। फिर भी व्यक्ति स्वतंत्र है। वह ईश्वर का सुझाव माने या ना माने, उसकी इच्छा। परीक्षा पूरी होने पर अर्थात मृत्यु के पश्चात् वह अंक देगा। न्याय अन्याय आदि सब कर्मों का फल देगा । 


      जो लोग अच्छे काम करेंगे, न्यायपूर्वक आचरण करेंगे, उनको अगला जन्म मनुष्य का देगा । जो लोग आज अन्याय कर रहे हैं,अगले जन्म में ईश्वर उनको पशु पक्षी कीड़ा मकोड़ा सांप बिच्छू वृक्ष वनस्पति आदि योनियों में डालकर दुख देगा। यह उसकी कर्म फल व्यवस्था है , और न्याय व्यवस्था है। इसलिए संशय का समाधान ढूंढें। संशय को मन में स्थापित न करें । तब आप ठीक प्रकार से जीवन जी सकेंगे। 


 


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