सच्ची तपस्या

संसार में अनेक प्रकार के लोग दिखते हैं। कुछ स्वार्थी होते हैं, और कुछ परोपकारी। स्वार्थी लोग अधिकतर अपने ही लाभ की बात सोचते हैं, दूसरों के लिए कुछ नहीं। ऐसे लोग सदा दुखी परेशान चिंतित और तनावग्रस्त रहते हैं। उन्हें जितनी भी वस्तुएँ धन संपत्ति सुविधाएं मिल जाएँ, वे कभी भी संतुष्ट नहीं होते। इसलिए सदा दुखी रहते हैं। इतना ही नहीं, जब किसी और को सुविधाएँ मिलती हैं, धन सम्मान मिलता है, तो उसे भी वे सहन नहीं कर पाते, तथा उनकी उन्नति या  सुख सुविधाओं को देख कर जलते रहते हैं। ऐसा स्वभाव अच्छा नहीं है।
कुछ दूसरे लोग परोपकारी स्वभाव के होते हैं, जो सदा प्रसन्न रहते हैं। दूसरों की उन्नति में ही अपनी उन्नति समझते हैं। वे अपनी उन्नति भी करते हैं, परंतु दूसरों की उन्नति में भी पूरा बल लगाते हैं। दूसरों को सुख सुविधाएं देकर बहुत प्रसन्न होते हैं। दूसरों को धन संपत्ति सेवा सुख आदि सदा ही देते रहते हैं। 
वे दूसरों से जलते नहीं हैं, बल्कि दूसरों के लिए जलते हैं, अर्थात तपस्या करते हैं। दूसरों को सुख देने में ही उन्हें अपना सुख मिलता है, जो कि ईश्वरीय व्यवस्था है। ऐसा स्वभाव  अच्छा है। 
आप भी यदि सदा प्रसन्न सुखी आनंदित निश्चिंत जीवन जीना चाहते हों, तो आप भी दूसरों के लिए जलें, दूसरों से नहीं। यदि आप दूसरों के लिए जलेंगे, तो दूसरे लोग भी आपका सम्मान करेंगे। - स्वामी विवेकानंद परिव्राजक


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