रिश्तो का स्वार्थी सच

बहुत बार लोग इस बात से दुखी रहते हैं, कि हमारे कई मित्र संबंधी रिश्तेदार हमें सिर्फ उसी दिन याद करते हैं, जिस दिन उनको हमारी आवश्यकता होती है। साल भर हमें पूछते भी नहीं। जिस दिन काम पड़ता है, उस दिन खूब आगे पीछे घूमते हैं। 
तो इस बात से वे लोग दुखी, परेशान रहते हैं। मेरा आप सब से निवेदन है कि इस बात से परेशान न होवें। जरा सोचिए, अगर एक व्यक्ति मुसीबत में है, और वह आपको याद करता है, तो इसका अर्थ हुआ, कि वह आपको अपनी समस्या के समाधान के रूप में देखता है। अर्थात आपके पास उसकी समस्या का समाधान है। तो इसमें बुरा क्या है?
वह आपको याद करता है, यह तो आप के लिए सौभाग्य की बात है।
जरा सोचिए, क्या कोई व्यक्ति हर रोज मोमबत्ती को याद करता है? नहीं न! वह उसी दिन याद करता है, जिस दिन लाइट चली जाती है। तो इसी प्रकार से समस्या उत्पन्न होने पर,कोई आपको समाधान के रूप में याद करता है, तो आपके लिए तो खुशी की बात है। आप उससे ऊंचे हैं। इसलिए दुखी न हों, बल्कि ऐसा सोचकर प्रसन्न होवें,  कि किसी को मेरी जरुरत है। मैं भी किसी से ऊंची स्थिति में हूँ, जिस को मेरी जरुरत है। 


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