परमात्मा

समस्त ब्रह्माण्ड मेँ एक ही सर्वोपरि, सर्वोच्च, सर्वाधिक, सर्वश्रेष्ठ महा सत्ता परमात्मा की ही है, ब्रह्माण्ड की उसी महा सत्ता से ही प्रत्येक मनुष्य अपने अपने प्रयत्न, पुरुषार्थ, संकल्प, त्याग, तप व साधना द्वारा अपने अपने कार्य क्षेत्र में ओज और तेज को प्राप्त कर ओजस्वी और तेजस्वी बनते हैं ! संसार में कुछ ऐसे व्यक्ति ही शक्तिशाली, शक्तिमान, तेजस्वी,  प्रभावशाली, प्रतापी, ओजयुक्त, जोश और होश पैदा करने वाले होते हैं । ऐसे ओजस्वी व्यक्तियों
के किसी भी काम के आरम्भ में भले ही कई अड़चनें आएंं लेकिन वे अपने दृढ़ संकल्प व पुरुषार्थ से अवश्य ही अपने साकारों को सिद्ध कर लेते हैं ! ऐसे व्यक्ति किसी भी व्यक्ति अथवा परिस्थति से कभी नहीं डरते, हो सकता है कि उनका यह दृढ़ संकल्प उनके लिए किसी परेशानी का कारण भी बन जाए ! लेकिन ऐसे व्यक्तियों में नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता होती है ! 
प्रत्येक व्यक्ति को उसी महा शक्तिशाली, ओजस्वी परमात्मा से ही ओज और तेज प्राप्त करने की प्रार्थना प्रति दिन करनी योग्य है !
- हरिलाल गुरदासमल दलवानी


Popular posts from this blog

वैदिक धर्म की विशेषताएं 

ब्रह्मचर्य और दिनचर्या

अंधविश्वास : किसी भी जीव की हत्या करना पाप है, किन्तु मक्खी, मच्छर, कीड़े मकोड़े को मारने में कोई पाप नही होता ।