मनुष्य के मित्र बारे

संसार में बहुत से लोग उत्तम व्यवहार करते हैं। वे सच्चे मित्र होते हैं। सच्चे मित्र की पहचान यह है, कि वह अपने साथी को बुराइयों से बचाता है। सन्मार्ग पर चलने को प्रेरित करता है। आपत्तिकाल में उसकी सहायता करता है। आर्थिक मदद भी करता है । उसका हितचिंतक एवं हितकारी होता है। उसके दोषों को दूर करता है। उसमें गुणों का आधान करता है। ये उत्तम मित्र के लक्षण हैं।
 ऐसे लक्षण वाले लोग संसार में देखे जाते हैं। परंतु कुछ लोग इसके विपरीत गुण कर्म स्वभाव वाले भी होते हैं। ऐसे लोग शत्रु नाम से कहे जाते हैं। 


अपने मित्रों और शत्रुओं की पहचान करें। व्यवहार का बार-बार परीक्षण करें । दूसरों के व्यवहार का बार-बार परीक्षण करने से उनके गुण कर्म की पहचान हो जाती है। 
यदि आपके संपर्क में आने वाले लोग मित्रों जैसा व्यवहार करते हैं, तो उनके साथ आनंद से अपना जीवन बिताएं। जो शत्रु जैसा करते हैं उनसे सावधान रहें। उनसे दूर रहें,  ताकि वे आपकी किसी प्रकार की हानि न कर पाएँ।  आपको हमारी बहुत शुभकामनाएं हैं कि आपके जीवन में ऐसे अनेक मित्र हों, जो आपके लिए हितकारी हों। वे अपने उत्तम गुणों की सुगंध से आपके जीवन को भी सुगंधित कर देवें।* - स्वामी विवेकानंद परिव्राजक


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