कुरान बनने की और ईस्लाम शुरु होने की कहानी

कुरान बनने की और ईस्लाम शुरु होने की कहानी                                                                   
मुहम्मद साहब अकसर गार ऐ हिरा गुफा में ऐकांत में आराम करने जाया करते थे, मुहम्मद साहब की पहली बीवी हजरत खादिजा के अनुसार - ऐक मरतबा गार ऐ हिरा गुफा में फरिश्ता जीब्रील आया और अकेले मुहम्मद साहब को कुरान की पहली आयात सुनाया, बोला सातवे आसमान पर बैठे अल्लाह ने भेजी है, यही कहानी से कुरान और ईस्लाम की शुरुआत होती है, मजे की बात येह है की ईस कहानी के गवाह खुद मुहम्मद साहब और बीवी हजरत खादिजा थे सिर्फ, 
तीसरा गवाह कोई नहीं है आजतक
बाद में हिरा गुफा वाली कहानी हजरत खादीजा ने अपने भाई को सुनाई, उसने मुहम्मद साहब को रसुल (अल्लाह का Messenger) कहलाने का सपना दिखलाया, फिर करीब 30 महिने तक गुपचुप ईस्लाम का प्रचार किया गया, तबतक केवल 7 लोगो ने ईस्लाम को कबुल किया था, उसमें अली अबुबकर, बीवी खादीजा, खादीजा का भाई और गुलाम पुत्र जैद तथा खादीजा की संताने शामिल हुई थी.......अगर सच में अल्लाह है और उनके  बनाऐ गऐ 90 अरब फरिश्ते ईस दुनिया में मौजुद है जो की कुरान कहेता है तो अल्लाह ने फरिश्ता जीब्रील के जरिये मुहम्मद साहब को रसुल (अल्लाह का संदेशा वाहक, Messenger) बनाने का काम हिरा गुफा के अंदर छुपकर क्यु करवाया ?? अल्लाह आदेश देकर अरबीस्तान में सरेआम सबके सामने फरिश्ता जीब्रील द्वारा मुहम्मद साहब को रसुल की नियुक्ति का ऐलान करवाते और मुहम्मद साहब को अल्लाह का रसुल (Messenger) होने की शपथ दिलाते ना ? 
जो नही हुआ,  
मुहम्मद साहब, बीवी खादीजा, खादिजा का भाई और पुरे मुहम्मद परिवार की येह सब बाते अविश्वसनीय लगती है 
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