जीवन में सच की सीख

अपना जीवन सही तरह से चलाने के लिए आपको सत्य असत्य का  परीक्षण निरीक्षण ठीक प्रकार से करना पड़ेगा। इसके लिए कुछ आपको मेहनत करनी पड़ेगी। कुछ प्रमाणों और तर्क से विचार एवं व्यवहार करना पड़ेगा।
 संसार में प्रायः लोग इतनी मेहनत नहीं करते। प्रमाणों से विचार नहीं करते। सुनी सुनाई बातों पर विश्वास कर लेते हैं। जनता को मिर्च मसाला लगाकर बोलने की आदत है। वे तो तमाशा देखना चाहते हैं। बात को बढ़ा चढ़ाकर के फैला देंगे। छोटी सी बात का इतना बड़ा बतंगड़ बना देंगे। परंतु जब उसकी सच्चाई की खोज की जाएगी, तो पता चलेगा , कि बात तो कुछ भी नहीं थी, मामूली सी बात थी, और उस निर्दोष को इतना बदनाम कर दिया। इसलिए यदि आप अपना जीवन सुख शांति से सुरक्षित रूप से जीना चाहते हैं, तो सुनी सुनाई बातों पर विश्वास न करें। ऐसी बातों को सुनकर तुरंत कोई प्रतिक्रिया न करें। पहले उसकी जांच परख पूरी प्रमाणों से तर्क से कर लेवें, उसके बाद यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाए तब उसके विरुद्ध कुछ प्रतिक्रिया व्यक्त करें। अन्यथा आपके संबंधों में दरारें शुरू हो जाएंगी। और यदि ऐसा आप अनेक बार करेंगे, तो आपके संबंध कमजोर होते होते टूट जाएंगे। तब आपका जीवन कठिन होगा।  इसलिए बुद्धिमत्ता से काम लेवें। प्रमाणों से परीक्षा करके ही कोई बात मानें, अपने जीवन और संबंधों को सुरक्षित बनाएं।


Popular posts from this blog

वैदिक धर्म की विशेषताएं 

ब्रह्मचर्य और दिनचर्या

अंधविश्वास : किसी भी जीव की हत्या करना पाप है, किन्तु मक्खी, मच्छर, कीड़े मकोड़े को मारने में कोई पाप नही होता ।