गुलामी के दो चरण

गुलामी के दो चरण -            
पहले हम बौद्धिक गुलाम होते है ,उसके बाद  हम शारीरिक गुलाम हो जाते है ।
आज से लगभग 5००० वर्ष पूर्व जब आम आदमियों ने   ईश्वरीय वेद ज्ञान पढ़ना छोड़ा या छुडाया गया , तब पाखंडियो ने  १८ पुराण में  इस तरह  की  मिलावट , कि पहले हम १८ पुराण के  बौद्धिक गुलाम हुए, फिर हमको मुगलो और अंग्रेजो ने बौद्धिक एवं शारीरिक गुलाम बना लिया । 
१८ पुराण में निम्नलिखित वेद विरुद्ध सिद्धांत है - १८ पुराण में कुछ विज्ञान (सत्य ) भी है , हम यहाँ केवल मिलावट की बात कर रहे है 


१-ईश्वर का अवतार होता है । सबसे ज्यादा पाखंड इसी से हुआ , आज और  पहले भी अनेक पाखंडी खुद को ईश्वर का अवतार घोषित कर रहे है । और ये पाखंडी आज भी  आम आदमी को लूट रहे है । परम् पिता परमेश्वर की जगह  की पत्थर ,प्लास्टिक, कागज  को ईश्वर मानना ,इन्ही पाखंडियो  की देन है , मेरा इन पाखंडियो  से कहना है की मिट्टो को शक्कर मानकर क्यों नहीं खाते ।  मिटटी की बनी मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा जैसा ढोंग इन पुराणों बताया गया  है ।
२-  मांसाहार का सेवन - मांसाहार का सेवन इन पुराणों में लिखा है ।
३- गो हत्या - इन पुराणों में दी हुई है 
४-नरबलि - नरबलि , १८ पुराणों की देन है ।
५- फलित ज्योतिष -  इस सिद्धांत से आम आदमी को जमकर लूटा और आज भी आम आदमी की लुटाई हो रही है ।
6- व्याभिचार - पाखंडियो ने योगेश्वर  श्री  कृष्ण महाराज  पर ही ऐसे आरोप लगा दिए जिसको हम अपनी बहन बेटियों के सामने पढ़ भी नहीं सकते ।
७- नशेड़ी - पाखंडियो ने भगवान शिवजी महाराज को नशेड़ी बना दिया । 
८- जातिवाद , छुआछूत , फुट डालो राज करो , मानव में भेद करने के लिए , शुद्रो एवं  स्त्रियों को सम्मान न देना इन पाखंडियो ने शुरू किया ।
९- इन १८ पुराण में बहुत गप्प भरी हुई है । जैसे किसी व्यक्ति का लाखो वर्ष जीवित रहना इत्यादि ।


इन १८ पुराण के पाखंड , गप्प से दुःखी होकर  अनेक व्यक्तिओ ने  जैन मत , ईसाई मत , मुस्लिम मत , बौद्ध मत शुरू किये , इन व्यक्तिओ के  मतों में अनेक सिद्धांत  वेद विरोधी है । जो वेद विरोधी सिंद्धांत है उन्ही से नरसंहार ,आतंकवाद , उग्रवाद , नक्सलवाद  बढ़ रहे है ।


और भी  बहुत से पाखंड इन पाखंडियो ने चला रखे है ।


किसी भी भाई को  १८ पुराण में जो मिलावट है उसके प्रमाण चाहिए, तो हम उपलब्ध करा देंगे ।



आज तो हमारे शिर पर दोहरी (पहली  १८ मिलावटी पुराण की  दूसरी अंग्रेजो की )  बौद्धिक गुलामी चढ़ी हुई है । अपना मूलयांकन खुद कर ले की हम अंग्रेजो के कितने बौद्धिक गुलाम है ? अंग्रेजी बौद्धिक गुलामी का प्रमाण निमनुसार है -
1-ईश्वरीय भाषा संस्कृत , हिंदी को छोड़कर अंग्रेजी बोलने में गर्व महसूस करना ।
२- धोती कुरता पहने व्यक्ति को हीन समझना और कोट पेन्ट वाले को सम्मान देना ।
३- सात्विक भोजन वाले को रूढ़िवादी बताना और मांस खाना, सम्मान समझना ।
४- आदमी का मूल्याङ्कन ज्ञान की बजाय धन से करना ।
५- शादी की जगह लिव इन रिलेशनशिप में रहना 
६- हमारे ऋषियो और वीर पुरुष सुभाष चंद्र बोष ,भगत सिंह इत्यादि , के बजाय फ़िल्मी भांड लोगो के सम्मान देना ।
७- हमारे ऋषियों के अनुसन्धान , कच्ची मिटटी के घर , मिटटी के बर्तन, गुड़ , इत्यादि को हीन समझना और यूरोप की अविद्या से बने  सीमेंट , चीनी  आदि को महत्तव देना ।
उपरोक्त वेद विरोधी सिंद्धांत की वजह से पहले करीबन 4००० साल १८ पुराण के पाखंडियो के बौद्धिक  गुलाम रहे , फिर ८०० साल शारीरिक एवं बौद्धिक  मुगलो के  , २०० साल अंग्रेजो के  शारीरिक बौद्धिक एवं  गुलाम रहे , इन गुलामी का दंड सबसे ज्यादा हमारी बहन- बेटियों ने भुगता , अफगानिस्तान में हमारी नंगी बहन- बेटियों को दो -दो दीनार में बोली लगी , १९९० में कश्मीर में हमारी बहन- बेटियों ने फिर अत्याचार सहे ।
गुलामी में जब हमारी बहन -बेटियों के साथ अत्याचार  होते है, उसके डर की वजह से आज हम खुद ही गर्भ में बेटी को मारकर सबसे  घ्रणित कार्य कर रहे है ।


उपरोक्त वेद विरोधी सिद्धांत की वजह से भारत में ९० करोड़ लोग शारीरिक रूप से बीमार है और आज भारत पर ५० लाख करोड़ रूपये से अधिक कर्ज है एवं हमारे ७२ रूपये एक डॉलर के बराबर है । ये सब पाप वेद विरुद्ध होने पर हो रहे है ।
 
आओ ऋषिकृत हिंदी वेद भाष्य एवं ईश्वर को आधुनिक वैज्ञानिक से समझने के लिए वेद विज्ञान -अलोक को पढ़े ।


वेद के सिद्धांतो को समझने के लिए हम  २९ फरवरी एवं एक मार्च को दो दिवस का शिविर भी रखा  है , इस शिविर में भाग लेवे , यह शिविर पूर्णत निशुल्क रखा गया है । 


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