एक स्वस्थ चिंतन - विद्या की महत्ता पर

एक स्वस्थ चिंतन - विद्या की महत्ता पर -


विद्या के अभाव में   १०० करोड़ रूपये  का मालिक भी गरीब एवं दुखी  हो सकता है, और एक चौक का, पढाई में अक्षर ज्ञान वाला  मजदूर भी  विद्या के प्रभाव में आकर अमीर एवं सुखी रह सकता है ।


जाने ये कैसे होगा ?


पहले हमें कुछ परिभाषा जाननी  होगी ।


विद्या - बुद्धि द्वारा तर्क से ज्यों का त्यों जानना , जिससे समस्त मानव एवं जीव जन्तुओ के जीवन को पूर्णकालिक सुख मिल सके , वही विद्या है ।
गरीब - जिसकी इच्छा बाकि है।
अमीर- जिसके पास पर्याप्त धन हो जिससे अपनी इच्छा पूरी कर सके । 
सुख - इसकी शुरुआत निरोगी शरीर से होती है एवं स्वतंत्र पूर्वक जीवन जी सके । किसी के पराधीन  कार्य करना स्वतंत्र नहीं माना गया है । 


हम केवल चौक के मजदूर  की बात करेंगे, की वो अमीर और सुखी  कैसे रहे , जब ये हो सकता है तब तो दुनिया का कोई भी आदमी हो सकता है ।  - 
अब उसको विद्या जानना पड़ेगा , और वह मेरे पास आएगा की मेरे चार बच्चे है और  चौक पर ३०० रूपये के हिसाब से बड़ी मुश्किल से खर्चा चल पाता है और बीमार हो जाये तो भीख मांगनी पड़ती है । आप बताओ मैं सुखी और  अमीर कैसे  बनू ? 
अब वह मेरे पास आता - उसको कैसे अमीर और सुखी  बनाता हु -
उसको अब मैं अपने फार्म पर एक वर्ष के लिए ३००/- प्रतिदिन के हिसाब से रखता हु । क्योकि वह अभी ३०० रूपये ही कमा रहा था ।


एक वर्ष में मैं उसको विद्या का  प्रशिक्षण देता हु एवं खुद अपने हाथो से वह कार्य भी करता है । जिससे वह एक एकड़ खेत में  वैदिक तरीके से २ लाख रूपये कैसे कमाए , एवं एक देशी गाय से प्रतिवर्ष केवल गोमूत्र और गोबर से  एक लाख कैसे कमाए , वैदिक चिकत्सक १४८ रोगो का जिसमे कैंसर भी शामिल है , वैदिक  प्रबन्धक ,और बलिष्ठ बलशाली कैसे बने ,वह सब  समझकर जान जाता है ।
एक वर्ष पश्चात् वह अपने गांव जाता है और २५ हजार प्रति एकड़ के हिसाब से ५ एकड़ खेती की जमीन किराये पर लेता है और पांच गाय बिना दूध वाली उसको फ्री में मिल जाती है । इन सभी से वह प्रतिवर्ष  जमीन का किराया काटकर 8  लाख रूपये  आराम से कमा सकता है ।
अब वह विद्या को जानता है । विद्या  जानकर निचे निम्नानुसार कार्य करता है -
१- उसको पता चल चूका है की की मुझे जीवन क्यों मिला ? मैं कौन हु ? और मैं यहाँ क्या करने आया हु ? ये शरीर का क्या महत्त्व है , और ईश्वर को वह वैज्ञानिक दृस्टि से समझ चूका होता है । ईश्वर के कार्य  करने की विधि भी जान चूका होता है । 
                          अपना उद्देश्य पूरा करने  के लिए वह 2 से 3 घंटे प्रतिदिन आर्ष ग्रंथो का  स्वाध्याय  करता है । जिसमे ऋषिकृत हिंदी भाष्य  चारो वेद , वेद विज्ञान- अलोक , अग्निवर्त्त जी द्वारा ऐतरेय ब्राह्मण ग्रन्थ सृस्टि विज्ञान आदि । जिससे उसको  समस्त ब्रह्मण्ड की कार्यशैली और उपयोगिता पता चलती है ।
२-कच्ची मिटटी से घर का निर्माण करता है जिसमे उसकी उसकी लगत केवल २ लाख रूपये आती है सीमेंट का घर इसलिए नहीं बनाता उसे  पता चल चूका है की उसमे रहने से व्यक्ति बीमार हो जाता है और वायुमंडल प्रदूषित होता है ।
3- उसके घर में टीवी नहीं है उसको पता चल चूका है की इसमें ९९% खबरे झूटी रहती है , इसलिए वह youtube पर मनचाही जानकारी लेता है ।
४- उसके घर में भोजन उपयोगी मिटटी के बर्तन है , वह हमेशा तजा भोजन करता है इसलिए उसे फ्रीज़ की जरुरत नहीं है  ।
५- वह कभी बीमार नहीं होता है यदि हो भी जाये तो खुद ही अपने को ठीक कर लेता है । उसकी १०० वर्ष की होती है और उसके बच्चे २०० वर्ष एवं उसके पोते ३०० से ४०० वर्ष जीवन जीते है और मुक्ति को प्राप्त होते है 
६- दिन में वह और उसकी पत्नी एक घंटे लोगो की चिकित्सा करते  है जिससे उनको अतिरिक्त  १०-१५ हजार महीने की आमदनी होती है । 
७-वह समय बर्बाद करने कोई तीर्थ नहीं जाता क्योकि तीर्थ क्या है उसको समझ आ चुकी होती है ।
८- वह कभी फ़िल्मी भांड लोगो  की फिल्म नहीं देखता है ।
९- उसका पहनावा भारतीय - सादा कुरता धोती और पगड़ी पहनता है , पगड़ी की महत्ता उसको मालूम है की उससे सर का तापमान हमेशा एक जैसा रहता है जो बुद्धि के लिए जरुरी है , कभी भी उसको कभी  ४- ५ जोड़ी से कपडे की आवश्यकता नहीं होती । 
१०- उसका भोजन हमेशा सात्विक होता है ।
११- उसके घर में प्रतिदिन हवन होता है जिससे वायुमंडल का प्रदुषण दूर हो सके और समय पर वर्षा हो ।
१२ - उसके बच्चे विद्या के लिए ८ वर्ष आयु पूर्ण होने पर   आर्ष  गुरुकुल में पढ़ते है जहा पर सालभर का खर्च केवल २५ हजार होता है ।
१३ - ५ वर्ष पश्चात गांव के लोग उसको सरपंच की जवाबदारी के लिए आग्रह करते है , परन्तु वह मना कर देता है की मेरे पास सत्य के सिवा कुछ नहीं है और आज के समय में सत्य पर राजनीति नहीं होती । परन्तु गांव वालो के विशेष आग्रह को मान लेता है , और पुरे गांव को विद्या के अनुसार रहन सहन में परिवर्तन करवाता  है जिससे  आगे चलकर इसी गांव से महादेव शिवजी , मर्यादा परुषोत्तम  श्रीराम जी  ,महाराज  श्रीक्रष्ण  ऋषि कणाद जी आदि  जैसे योगी, इसी गांव से पैदा होते है , और इसी परम्परा का पुरे विश्व में पालन होने लगता है ।  
आओ पहले विद्या को  जाने फिर उसके अनुसार  जीवन जिए ।
उपरोक्त विषय के लिए संपर्क कर सकते है }
राकेश उपाध्याय 
९९२६१८५००१


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